बड़वानी: रात के अंधेरे में डंपर संचालन का विरोध करने पर सरपंच पर एफआईआर, ग्रामीणों में भारी आक्रोश

बड़वानी: जिले के ग्राम काली बेड़ी और कुंडिया के बीच मिट्टी से भरे डंपरों की रात के समय आवाजाही को लेकर विवाद गंभीर रूप ले चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध रूप से गुजर रहे डंपरों का विरोध करने पर ग्राम सरपंच के साथ मारपीट की गई और उल्टा उन्हीं के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर दी गई। इस घटनाक्रम से स्थानीय स्तर पर भारी आक्रोश व्याप्त है।

ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ समय से रात के अंधेरे में भारी संख्या में मिट्टी से भरे डंपर गांव के कच्चे मार्गों से गुजर रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से डूब क्षेत्र के गांवों को जोड़ने वाली पहले से ही कमजोर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की कगार पर हैं।

मंगलवार-बुधवार की रात जब सरपंच और ग्रामीणों ने इस आवाजाही का विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने गांव में आकर माहौल तनावपूर्ण बनाया, सरपंच के साथ मारपीट की और ग्रामीणों को धमकाया कि वाहन इसी मार्ग से निकलेंगे। ग्रामीणों की सबसे बड़ी नाराजगी इस बात को लेकर है कि विवाद के बाद उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय सरपंच के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली गई।

इस मामले में बुधवार शाम जिला पंचायत सदस्य करण दरबार और सरपंच सीताराम वास्कले के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ग्रामीण शहर कोतवाली पहुंचे। उन्होंने थाना प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन से मिलकर डंपर संचालन की निष्पक्ष जांच करने और सरपंच के साथ मारपीट करने वाले दोषियों पर मामला दर्ज करने की मांग की।

शहर कोतवाली प्रभारी बलजीत सिंह बिसेन ने बताया कि काली बेड़ी और कुंडिया के बीच वाहन निकालने को लेकर हुए विवाद के मामले में एक व्यक्ति के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस ग्रामीणों द्वारा दी गई शिकायतों और पूरे मामले के तथ्यों की बारीकी से जांच कर रही है, जिसके आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अब क्षेत्र में यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि गांवों के बीच से रात के समय भारी वाहनों के संचालन की अनुमति किसने दी और यदि यह आवाजाही अवैध है, तो अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे इन सवालों के बीच क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए सभी की निगाहें अब जिला प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

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    Rashel Kachwah Rajput

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