
भोपाल से एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां महिलाओं ने पंचायतों की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। टैक्स सखियों ने बदली पंचायतों की अर्थव्यवस्था इस पहल के तहत प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन में एक साल में पांच गुना से अधिक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। भोपाल जिले की 222 पंचायतों के 479 गांवों में महिलाओं ने यह जिम्मेदारी संभालते हुए कुल 5.15 करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन किया है।

कैसे काम करता है टैक्स सखी मॉडल?
टैक्स सखी मॉडल के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को प्रॉपर्टी टैक्स वसूली की जिम्मेदारी दी गई है। ये महिलाएं घर-घर जाकर लोगों को टैक्स भुगतान के लिए जागरूक करती हैं और कलेक्शन भी करती हैं। इस पहल की खास बात यह है कि महिलाओं को वसूली गई राशि का 10% इंसेंटिव दिया जाता है, जिससे उनकी आय भी बढ़ती है और काम के प्रति उत्साह भी बना रहता है।
पांच गुना बढ़ा कलेक्शन, पंचायतें हुईं मजबूत
इस मॉडल के लागू होने से पहले टैक्स कलेक्शन बहुत कम था, लेकिन अब इसमें जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिली है। एक साल में कलेक्शन पांच गुना बढ़कर 5.15 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इससे पंचायतों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है और विकास कार्यों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध हुए हैं।
महिलाओं के लिए बना रोजगार का जरिया
टैक्स सखी मॉडल ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाई है। यह पहल न केवल रोजगार का अवसर दे रही है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक भागीदारी भी बढ़ा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी से शासन की योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन भी संभव हो रहा है।
आगे क्या है योजना?
प्रशासन इस मॉडल को और अधिक पंचायतों में लागू करने की योजना बना रहा है। इसके जरिए पूरे जिले और अन्य क्षेत्रों में भी टैक्स कलेक्शन और विकास कार्यों को बढ़ावा दिया जाएगा।
भोपाल का टैक्स सखी मॉडल ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण का एक सफल उदाहरण बनकर सामने आया है।
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