मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ‘स्वर्णिम मध्य प्रदेश’ के विजन पर भारी पड़ता ‘सिंडिकेट’: क्या नौकरशाही की घेरेबंदी रोक रही है प्रदेश का विकास?

हजारों युवाओं के रोजगार और नवाचार की फाइलें धूल फांक रहीं, सीएम तक नहीं पहुँचने दी जा रही जनहित की योजनाएं; ‘ब्रांड्स ग्रुप’ के चेयरमैन विवेक द्विवेदी ने व्यवस्था पर उठाए सवाल।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपनी बेदाग छवि, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाने के संकल्प के लिए जाने जाते हैं। लेकिन क्या मुख्यमंत्री की यह नेक मंशा धरातल पर उतर पा रही है? यह एक बड़ा सवाल है। ब्रांडवाणी समाचार की पड़ताल में यह सामने आया है कि मुख्यमंत्री के इर्द-गिर्द कुछ ऐसे रसूखदार लोगों और आईएएस अधिकारियों का ‘घेरा’ बन चुका है, जो विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

विजन और हकीकत के बीच की दीवार

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए लगातार काम करना चाहते हैं, परंतु उनके इर्द-गिर्द सक्रिय एक खास ‘सिंडिकेट’ केवल अपने निजी हितों को साधने में लगा है। विडंबना यह है कि जब भी कोई समाजहित या प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा बड़ा विजन सामने आता है, तो यह घेरा उसे मुख्यमंत्री तक पहुंचने ही नहीं देता। इस घेरेबंदी के कारण मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है, जबकि गलत फैसले ये अधिकारी और उनके करीबी लोग लेते हैं।

लाखों युवाओं के रोजगार पर ‘सिस्टम’ का ताला

ब्रांड्स ग्रुप के चेयरमैन विवेक द्विवेदी, जो लंबे समय से मध्य प्रदेश के विकास और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के विजन पर काम कर रहे हैं, उन्होंने इस व्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की है। श्री द्विवेदी ने बताया कि उनके पास एक ऐसा रोडमैप तैयार है जिससे प्रदेश के लाखों युवाओं को रोजगार मिल सकता है, लेकिन प्रशासनिक बाधाओं और मुख्यमंत्री के आसपास मौजूद कुछ स्वार्थी तत्वों के कारण वह विजन धरातल पर नहीं उतर पा रहा है।

मेरा प्रयास हमेशा से अपने प्रदेश को आगे बढ़ाने और जनता के बीच सकारात्मक संदेश पहुंचाने का रहा है। लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुख्यमंत्री जी तक सही और क्रांतिकारी विचार पहुंचने ही नहीं दिए जाते। कुछ लोग केवल अपनी कमाई और पद का दुरुपयोग करने में व्यस्त हैं, उन्हें न तो प्रदेश के हित से मतलब है और न ही मुख्यमंत्री जी की साख से।”

 — विवेक द्विवेदी, चेयरमैन, ब्रांड्स ग्रुप

जानकारों का मानना है कि यदि मुख्यमंत्री इन ‘अदृश्य दीवारों’ को नहीं तोड़ते हैं, तो प्रदेश के विकास की गति धीमी पड़ सकती है। एक तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिन-रात प्रदेश को ‘नंबर वन’ बनाने के विजन पर काम कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके आसपास का यह घेरा अच्छे प्रस्तावों को फाइलों में दबाकर बैठा है।

ब्रांडवाणी समाचार, शासन और प्रशासन से यह सवाल पूछता है कि क्या चंद अधिकारियों और रसूखदारों की व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाएं, मध्य प्रदेश के करोड़ों युवाओं के भविष्य से बड़ी हैं? क्या मुख्यमंत्री डॉ. यादव तक जनहित के विजनरी आइडियाज को पहुंचने से रोकना प्रदेश के साथ गद्दारी नहीं है?

अब समय आ गया है कि इस ‘घेरे’ को तोड़कर सीधे संवाद की व्यवस्था कायम की जाए, ताकि विवेक द्विवेदी जैसे विजनरी उद्यमियों के विचार प्रदेश को नई दिशा दे सकें।

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gaurav singh rajput

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