
सार
राजू सिंह राठौड़|बुरहानपुर। ग्राम मोहद-बोरकिबड़ी में पुलिया और सड़क की समस्या के कारण ग्रामीणों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए खटिया पर लिटाकर करीब 2 किलोमीटर तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से पुलिया और सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ।
विस्तार
बुरहानपुर जिले के ग्राम मोहद-बोरकिबड़ी में मूलभूत सुविधाओं की कमी ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। गांव में पुलिया नहीं होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को एंबुलेंस तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों को बीमार व्यक्ति को खटिया पर लिटाकर करीब 2 किलोमीटर तक सड़क के रास्ते ले जाना पड़ता है। इसके बाद मरीज को एंबुलेंस के जरिए उपचार के लिए बुरहानपुर ले जाया जाता है।
ग्रामीणों के मुताबिक यह समस्या लंबे समय से बनी हुई है। बारिश के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। रास्ते में पानी और आवागमन की समस्या के कारण मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गंभीर मरीजों के मामले में यह देरी परेशानी को और बढ़ा सकती है।
ग्रामीण कमल भील सोनी ने बताया कि गांव के लोग लंबे समय से पुलिया निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्ट्रीट लाइट की सुविधा भी नहीं है, जिससे रात के समय आने-जाने में काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का दावा है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत जियो-टेक की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके बावजूद सड़क और पुलिया निर्माण का काम शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों का सवाल है कि जब प्रक्रिया पूरी हो चुकी है तो निर्माण कार्य जमीन पर कब दिखाई देगा।
मोहद-बोरकिबड़ी के ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से पुलिया एवं सड़क निर्माण का काम जल्द शुरू कराने के साथ गांव में स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि बेहतर सड़क और पुलिया सिर्फ आवागमन के लिए जरूरी नहीं, बल्कि आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम चाहिए। सवाल यही है कि ग्रामीणों को अस्पताल पहुंचने से पहले खटिया के सहारे करीब 2 किलोमीटर की दूरी तय करने की मजबूरी से आखिर कब निजात मिलेगी?
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