
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे CJP ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि संबंधित प्रधान अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो किसी भी प्रकार की बैठक या वार्ता का कोई औचित्य नहीं रह जाता। संगठन का कहना है कि केवल बातचीत के भरोसे आंदोलन को समाप्त नहीं किया जा सकता और जब तक उनकी प्रमुख मांग पूरी नहीं होती, तब तक विरोध जारी रहेगा। इस बयान के बाद प्रदर्शन स्थल पर राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
इधर प्रदर्शनकारियों की ओर से पहले ही चेतावनी दी गई थी कि यदि इस्तीफा नहीं हुआ तो वे अगले चरण की कार्रवाई करेंगे। इसी को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के साथ बैरिकेडिंग बढ़ाई गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। आने-जाने वाले लोगों और प्रदर्शन स्थल पर नजर रखने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब केवल आश्वासन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। उनका आरोप है कि जिम्मेदारी तय किए बिना और संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ कार्रवाई किए बिना किसी भी वार्ता का सकारात्मक परिणाम निकलना मुश्किल है। वहीं प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। एक ओर प्रदर्शनकारी अपने रुख पर कायम हैं, तो दूसरी ओर प्रशासन स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि वार्ता के जरिए समाधान निकलता है या आंदोलन और अधिक तेज होता है। दोनों पक्षों के अगले कदम इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।
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