
भोपाल/ आदि मिश्रा: भोपाल के रविन्द्र भवन में सोमवार को ‘कृषि नवाचार में युवा संवाद’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मध्य प्रदेश युवा आयोग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कृषि क्षेत्र में हो रहे नए प्रयोगों और नवाचारों को लेकर संवाद किया। इस दौरान उन्होंने खेती, सिंचाई, पशुपालन और कृषि आधारित रोजगार को लेकर सरकार की योजनाओं और प्रदेश में हुए बदलावों का जिक्र किया।
‘आज भी खेत पर जाने में आनंद आता है’
युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि उन्हें आज भी खेत पर जाने में आनंद आता है। उन्होंने अपने शिक्षा जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने बीएससी की पढ़ाई की है, हालांकि यह कृषि विषय से नहीं थी। मुख्यमंत्री ने बताया कि उस समय उज्जैन के विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर का पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था। इसके बावजूद उनका कृषि से लगातार जुड़ाव रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश के हर विश्वविद्यालय में बीएससी एग्रीकल्चर के पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं, जिससे युवाओं को कृषि शिक्षा के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।
सिंचित क्षेत्र का दायरा बढ़ने का किया दावा
मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में सिंचाई के क्षेत्र में हुए विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 से पहले प्रदेश में करीब साढ़े सात लाख हेक्टेयर भूमि ही सिंचित थी। आज यह क्षेत्र बढ़कर करीब 59 लाख हेक्टेयर हो गया है।
उन्होंने कहा कि खेती में बदलाव के लिए पानी सबसे महत्वपूर्ण संसाधनों में से एक है। सिंचाई का दायरा बढ़ने से किसानों को अलग-अलग फसलों के उत्पादन के अवसर मिले हैं और कृषि क्षेत्र में नई संभावनाएं बनी हैं।
MSP, भावांतर और पशुपालन पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों की फसलों की खरीदी एमएसपी पर बोनस देकर कर रही है। उनके मुताबिक इसी वजह से मध्य प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा फसल खरीदी हो रही है। उन्होंने दलहन फसलों पर भावांतर योजना का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिर्फ परंपरागत खेती पर निर्भर रहने के बजाय पशुपालन को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री के अनुसार मध्य प्रदेश में करीब 6 करोड़ पशुधन है, लेकिन उसके अनुपात में उत्पादन को और बढ़ाने की आवश्यकता है।
गिर नस्ल की बछिया और नस्ल सुधार पर काम
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्नत नस्ल के पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। प्रदेश में दूध उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए गिर नस्ल की बछिया उपलब्ध कराने और पशुओं के नस्ल सुधार पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कृषि के साथ पशुपालन को जोड़कर किसान अपनी आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार कर सकते हैं। खेती और पशुपालन का बेहतर समन्वय ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर सकता है।
‘कृषि कल्याण वर्ष’ में नवाचार पर फोकस
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने इस वर्ष को ‘कृषि कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। उन्होंने किसानों और युवाओं से बहुफसली खेती के साथ-साथ कृषि आधारित नए व्यवसायों को अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि किसान सिर्फ फसल उत्पादन तक सीमित न रहें, बल्कि वेयरहाउस, फूड प्रोसेसिंग और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों में भी आगे आएं। इससे कृषि उत्पाद का बेहतर मूल्य मिल सकता है और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।
अवाकाडो से मोती और फूलों तक युवाओं के नए प्रयोग
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि मुख्यमंत्री ने प्रदेश के युवा किसानों से सीधे संवाद कर उनके कृषि नवाचारों को समझने की कोशिश की। संवाद के दौरान सामने आया कि मध्य प्रदेश के युवा किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अलग-अलग क्षेत्रों में प्रयोग कर रहे हैं।
कुछ युवा किसान अवाकाडो की खेती, कुछ मोती उत्पादन तो कुछ फूलों की खेती के जरिए अपनी आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। युवाओं के इन प्रयोगों को कृषि क्षेत्र में बदलती सोच और नई संभावनाओं के उदाहरण के तौर पर देखा गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज की खेती-किसानी पहले के मुकाबले काफी बदल चुकी है। किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए खेती में तकनीक, विविधता और नवाचार को शामिल करना जरूरी है। कार्यक्रम के जरिए सरकार ने युवाओं के अनुभव और उनके नए कृषि प्रयोगों को समझने के साथ ही कृषि क्षेत्र में रोजगार और आय बढ़ाने की संभावनाओं पर भी जोर दिया।
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