
भोपाल। इन दिनों कई जिलों के कलेक्टर अपनी जनसरोकार वाली छवि को मजबूत करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा ले रहे हैं। इसी क्रम में एक ऐसे कलेक्टर, जिनकी पृष्ठभूमि चिकित्सा क्षेत्र से भी जुड़ी रही है, द्वारा साझा किया गया एक वीडियो अब प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
हाल ही में कलेक्टर ने जिले के सरकारी अस्पताल के निरीक्षण का एक वीडियो अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया। वीडियो में वे अस्पताल का जायजा लेते हुए नजर आए। इसी दौरान प्रतीकात्मक रूप से उन्होंने स्टेथोस्कोप उठाकर कुछ मरीजों की जांच भी की। वीडियो का उद्देश्य उनकी संवेदनशील कार्यशैली और चिकित्सकीय अनुभव को सामने लाना माना गया।
हालांकि सोशल मीडिया पर इस प्रयास को मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने इसकी सराहना की, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी सक्रिय हो गए जो अधिकारी के पूर्व कार्यकाल और पुराने जिलों से जुड़े रहे हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर पुराने विवादों और चर्चित मामलों को लेकर फिर से बहस शुरू हो गई।
जानकारों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में सोशल मीडिया प्रचार हमेशा सकारात्मक परिणाम नहीं देता। कई बार पुराने मुद्दे भी दोबारा चर्चा में आ जाते हैं। यही वजह है कि वीडियो के कमेंट सेक्शन में भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
प्रशासनिक हलकों में इस घटनाक्रम को इस बात के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है कि सोशल मीडिया पर बनाई जाने वाली छवि और जनता की स्मृतियों के बीच संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता। फिलहाल वीडियो और उस पर आई प्रतिक्रियाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं।








