
दमोह| जिले से एक गंभीर सामाजिक घटना सामने आई है। दमोह दलित दूल्हे से मारपीट मामला के तहत हटा थाना क्षेत्र के बिजोरी पाठक गांव में बारात के दौरान दिव्यांग दूल्हे के साथ मारपीट करने वाले चार आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। अदालत ने उन्हें जेल भेज दिया है, जबकि पुलिस प्रशासन ने आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इस घटना ने सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
शादी में बवाल, घोड़ी से उतारने को लेकर विवाद
21 अप्रैल की शाम बिजोरी पाठक गांव में एक शादी समारोह के दौरान यह विवाद शुरू हुआ। दूल्हे गोलू अहिरवार की रछवाई घोड़ी पर निकाली जा रही थी। जब बारात लोधी मोहल्ले से गुजर रही थी, तभी कुछ लोगों ने दूल्हे को घोड़ी से उतरने के लिए कहा। जब उसने मना किया, तो आरोपियों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। इस दौरान दूल्हे की बहन के साथ भी मारपीट की गई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया। यह घटना न केवल एक परिवार के लिए दुखद रही, बल्कि समाज में जातिगत भेदभाव के मुद्दे को भी उजागर करती है।
ग्रामीणों के अनुसार, पहले भी इस तरह के विवाद सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार मामला सार्वजनिक होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। घटना ने यह भी दिखाया कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक समरसता को लेकर अभी भी कई चुनौतियां मौजूद हैं।
पुलिस की कार्रवाई तेज, NSA की तैयारी
घटना के बाद घायल दूल्हे ने हटा थाना पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तत्काल एससी-एसटी एक्ट और बीएनएस की अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दो टीमों का गठन किया गया, जिसमें साइबर सेल की मदद भी ली गई। पुलिस ने गुरुवार को चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। शुक्रवार को उन्हें विशेष न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस अधीक्षक श्रुतकीर्ति सोमवंशी ने प्रेस वार्ता में बताया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आरोपियों पर NSA लगाने का प्रस्ताव भेजा गया है।
हटा थाना प्रभारी सुधीर बेगी के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में गुप्पू उर्फ गोपाल, बिच्छू उर्फ विश्वनाथ, चिन्नू उर्फ जगदीश और पलटू उर्फ लक्ष्मण शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि समाज में गलत संदेश न जाए।
दमोह की यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई और NSA जैसे कड़े कदम की तैयारी यह संकेत देती है कि ऐसे मामलों में अब सख्ती बरती जाएगी।
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