
देवास/गौरव व्यास की रिपोर्ट: मध्य प्रदेश के देवास जिले में जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक बेटे पर करोड़ों रुपये की पैतृक जमीन हड़पने के लिए अपने ही पिता की पहचान बदलकर फर्जी व्यक्ति के जरिए जमीन का सौदा करने का आरोप लगा है। पीड़ित पिता की शिकायत, कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार तथा प्रारंभिक जांच के बाद बरोठा थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बरखेड़ा कोतापाई निवासी भगवान सिंह पटेल ने शिकायत में बताया कि उनके बेटे संजू उर्फ संजय पटेल ने अपने साथियों ईश्वर सिंह दरबार (राठौर), विजय सिंह राजपूत, रायसिंह दायमा और दूले सिंह दरबार के साथ मिलकर सुनियोजित तरीके से उनकी जमीन हड़पने की साजिश रची। आरोप है कि असली भूमिस्वामी भगवान सिंह पटेल की जगह एक फर्जी व्यक्ति को उनका पिता बताकर खरीदार के सामने पेश किया गया और उसी के माध्यम से जमीन का सौदा कराया गया।
शिकायत के अनुसार आरोपियों ने खरीदार अर्जुन सिंह राठौर को विश्वास में लेकर लगभग 11 लाख रुपये का लेनदेन किया और फर्जी व्यक्ति के माध्यम से नोटरी कर जमीन का सौदा कर दिया। जिस भूमि का सौदा किया गया वह सर्वे नंबर 454 और 455 में दर्ज लगभग 0.910 हेक्टेयर भूमि है, जिसकी बाजार कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है।
पीड़ित भगवान सिंह पटेल को इस कथित फर्जीवाड़े की जानकारी 3 जुलाई 2026 को तब मिली, जब उन्होंने एक समाचार पत्र में प्रकाशित सार्वजनिक सूचना देखी। नोटिस में अपनी जमीन से जुड़ी जानकारी देखकर उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद उन्होंने राजस्व अभिलेख, सार्वजनिक सूचना और अन्य दस्तावेजों की जांच की तो कथित साजिश का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्होंने पूरे मामले की लिखित शिकायत देवास कलेक्टर ऋतु राज सिंह और पुलिस अधीक्षक को सौंपकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद एसपी कार्यालय के निर्देश पर बरोठा थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस अधिकारी एच.एन. बॉथम ने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4), 319(2) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि दो अन्य मुख्य आरोपी अभी फरार हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है।
उधर, जिला प्रशासन ने भी मामले को गंभीरता से लिया है। देवास कलेक्टर ऋतु राज सिंह ने संबंधित अधिकारियों को पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही रजिस्ट्रार कार्यालय में इस कथित फर्जीवाड़े से जुड़े पंजीयन दस्तावेजों की जांच कर आवश्यक होने पर उन्हें निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पुलिस का कहना है कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज, नोटरी रिकॉर्ड, गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है और मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।
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