
धार/जी.एस पाटीदार की रिपोर्ट: ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में नया प्रशासनिक अपडेट सामने आया है। हाल ही में न्यायालय के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने नई विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें स्थल के प्रबंधन और उपयोग को लेकर नई व्यवस्था स्पष्ट की गई है।
नई जानकारी के अनुसार, एएसआई ने अपने दस्तावेजों में इस स्थल को “भोजशाला” के रूप में उल्लेखित किया है। आदेश के बाद परिसर में पूजा-अर्चना से जुड़ी व्यवस्थाओं को लेकर भी नई गाइडलाइन जारी की गई है, जिसके तहत वर्ष के 365 दिन पूजा की अनुमति दिए जाने की बात सामने आई है।
मामला लंबे समय से न्यायालय में विचाराधीन था, जिसमें दोनों पक्षों की ओर से ऐतिहासिक और पुरातात्विक दावों को लेकर अलग-अलग तर्क प्रस्तुत किए गए थे। न्यायालय के हालिया आदेश के बाद प्रशासनिक स्तर पर यह नया निर्णय लागू किया गया है। स्थानीय स्तर पर इस फैसले को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
कुछ संगठनों ने इसे सांस्कृतिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण निर्णय बताया है, वहीं प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार एएसआई की यह व्यवस्था न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में की गई है। कानूनी और पुरातात्विक विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला ऐतिहासिक धरोहर, संरक्षण नियमों और न्यायिक निर्देशों से जुड़ा हुआ है, इसलिए आगे की प्रक्रिया अदालत की निगरानी में ही आगे बढ़ेगी।
ये भी पढ़े – हाई कोर्ट ने भोजशाला को माना हिंदू मंदिर, एएसआई रिपोर्ट के आधार पर पूजा का अधिकार बहाल
- Dhar Bhojshala ASI New Order Court Decision









