
भोपाल: लोक प्रशासन विभाग में अनुशासन और सटीकता एक बेहद बुनियादी स्तंभ हैं। जब उत्तरदायी पदों पर आसीन अधिकारी ‘तकनीकी आंकड़ों’ के स्थान पर बिना किसी आधार के काम करना का सहारा लेते हैं, तो न केवल संस्थागत भरोसा प्रभावित होता है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा में भी संकट दिखाई देता है।
ब्रांडवानी के सूत्रों के अनुसार राजधानी के प्रशासनिक गलियारों में निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव की कार्यशैली की चर्चा खूब जोर शोर से हो रही है। अपनी सरलता से कार्यप्रणाली के लिए पहचाने जाने वाले प्रमुख सचिव का हालिया रुख विभाग के लिए एक कड़ा संदेश बनकर निकला है।
उन्होंने ने एक महत्वपूर्ण निर्माणाधीन परियोजना की समीक्षा के दौरान जब दो इंजीनियरों से तकनीकी मापदंडों पर स्पष्टीकरण मांगा, तो उन्होंने गैर-जिम्मेदाराना ढंग से कार्य को “अंदाज” के आधार पर संचालित होना स्वीकार किया है।
यह रवैया देख प्रमुख सचिव ने प्रशासनिक कार्यवाही करते हुए ,तत्काल अनुशासनात्मक कठोरता का आदेश दिया। मध्य प्रदेश सरकार की “जीरो टॉलरेंस” पर प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि लोक निर्माण जैसे संवेदनशील विभाग में अवैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है। साहब ने सिर्फ सबके सामने फटकार ही नहीं लगाई, बल्कि बाद में उन इंजीनियरों को अपने दफ्तर बुलाकर उनके काम और जिम्मेदारियों की याद भी दिलाई।
यह घटनाक्रम पूरे विभाग के लिए एक ‘बेंचमार्क’ सेट करता है, कि भविष्य में किसी भी परियोजना में डेटा और तथ्यों की अनदेखी को ऑफिस के सख्त नियमों को जान बूझकर उल्लंघन करना माना जाएगा। हालांकि निर्माण क्षेत्र में एक छोटी तकनीकी गलती भी जन-धन की व्यापक हानि का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रमुख सचिव का ‘सख्त प्रशासक’ वाला रूप यह सिद्ध करता है, अधिकारी का शांत और नरम स्वभाव कठोर निर्णय लेने में संकोच नहीं करता।
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