
एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो पर केंद्र सरकार ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। सरकार ने कहा है कि एथेनॉल फ्यूल में चींटियां लगने का दावा करने वाला वीडियो पूरी तरह भ्रामक और फर्जी है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पेट्रोल में सीधे गन्ने का रस मिलाने जैसी बातें तथ्यात्मक रूप से गलत हैं और लोगों को ऐसे दावों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।
सरकार के अनुसार, एथेनॉल एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाने वाला जैव ईंधन है, जिसे निर्धारित मानकों और गुणवत्ता परीक्षणों के बाद पेट्रोल में मिलाया जाता है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, प्रदूषण घटाना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना है। अधिकारियों ने कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, जिनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है।
सरकार ने यह भी बताया कि अब तक देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन के कारण इंजन खराब होने की कोई प्रमाणित रिपोर्ट सामने नहीं आई है। वाहन निर्माताओं और तेल कंपनियों द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप ईंधन उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि निर्धारित अनुपात में एथेनॉल मिश्रण आधुनिक इंजनों के लिए सुरक्षित माना जाता है और दुनिया के कई देशों में इसका सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी भी वीडियो या दावे को बिना सत्यापन के साझा न करें। सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम भारत की ऊर्जा सुरक्षा और हरित ईंधन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा इसके बारे में गलत जानकारी फैलाना लोगों को भ्रमित कर सकता है। ऐसे में केवल आधिकारिक स्रोतों से प्राप्त जानकारी पर ही भरोसा करना चाहिए।
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