
गुना/ मोहित सोनी: पिछले वर्ष भीषण बाढ़ के बाद केंद्रीय मंत्री एवं गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जिले में भू-माफियाओं और अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए थे। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि नदियों, नालों और सरकारी भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ बिना किसी दबाव के कार्रवाई की जाए। हालांकि, एक साल बीतने के बाद भी हालात में कोई खास बदलाव नजर नहीं आ रहा है। शहर की नदियां, तालाब और नाले आज भी अतिक्रमण की गिरफ्त में हैं, जिससे स्थानीय लोगों में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी बढ़ रही है।
बाढ़ के बाद सिंधिया ने दिए थे सख्त निर्देश
पिछले वर्ष बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए थे कि गलत काम करने वालों के खिलाफ खड़े हों और ऐसा माहौल बनाएं जिससे अवैध कब्जाधारियों में कानून का भय पैदा हो। उन्होंने तत्कालीन कलेक्टर किशोर कन्याल को मंच से ही भू-माफियाओं पर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे और कहा था कि वह अपने संसदीय क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध काम बर्दाश्त नहीं करेंगे।
नदियों और तालाबों पर लगातार बढ़ रहा अतिक्रमण
स्थानीय लोगों के अनुसार, सिंधिया की चेतावनी के बावजूद शहर के कई प्रमुख जल स्रोतों पर अतिक्रमण का सिलसिला नहीं रुका है। गुनिया और उड़िया नदियों के प्रवाह क्षेत्र में कथित रूप से प्लॉटिंग की जा रही है। वहीं गोपालपुरा और भुजरिया तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में अवैध निर्माण होने की बात भी सामने आ रही है। पनारिया नदी और शहर के प्रमुख नालों के आसपास सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध कॉलोनियां विकसित किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक कार्रवाई केवल बैठकों और कागजी निर्देशों तक सीमित रह गई है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ अपेक्षित सख्ती नहीं दिखाई जा रही, जिसके कारण अतिक्रमण हटाने का अभियान प्रभावी नहीं हो पा रहा है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोप
कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया है कि सत्ताधारी दल से जुड़े प्रभावशाली लोगों पर कार्रवाई नहीं होने से भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
मानसून से पहले बढ़ी चिंता
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नदियों, तालाबों और नालों से अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो भारी बारिश के दौरान जल निकासी प्रभावित हो सकती है और बाढ़ जैसी स्थिति दोबारा पैदा होने का खतरा बना रहेगा। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्रीय मंत्री की चेतावनी के एक वर्ष बाद जिला प्रशासन इस मुद्दे पर क्या ठोस कदम उठाता है।
नोट: खबर में राजनीतिक संरक्षण और अतिक्रमण संबंधी आरोप स्थानीय नागरिकों के दावों पर आधारित हैं। इनकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्ष का पक्ष उपलब्ध होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाना चाहिए।
- Guna-Encroachment-On-Rivers-And-Ponds-One-Year-After-Scindia-Ultimatum








