
गुना/मोहित सोनी की रिपोर्ट: शहर के वार्ड क्रमांक 11 में पिछले करीब 20 से 25 दिनों से दूषित पेयजल की आपूर्ति होने से स्थानीय लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। नलों से लगातार गंदा और दूषित पानी आने के कारण लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है। रहवासियों का कहना है कि पीने योग्य पानी नहीं मिलने से उन्हें मजबूरी में बाजार से पानी खरीदना पड़ रहा है, जबकि दूषित पानी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार, समस्या नई नहीं है। पिछले कई सप्ताह से नलों में गंदा पानी आ रहा है, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है। लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार नगर प्रशासन और संबंधित विभाग के अधिकारियों को लिखित एवं मौखिक शिकायतें दी हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है। रहवासियों का कहना है कि विभाग द्वारा कई बार पानी के नमूने (सैंपल) लेकर जांच कराई गई, लेकिन जांच के बाद भी जलापूर्ति व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। लोगों का आरोप है कि बार-बार टेस्टिंग होने के बावजूद नलों से आज भी दूषित पानी ही आ रहा है, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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दूषित पानी की वजह से वार्ड में रहने वाले बच्चों, बुजुर्गों और अन्य लोगों के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो जलजनित बीमारियों के फैलने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। कई परिवार पीने और खाना बनाने के लिए अलग से पानी की व्यवस्था करने को मजबूर हैं, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ रहा है। रहवासियों ने मांग की है कि जलापूर्ति लाइन की तकनीकी जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि दूषित पानी की आपूर्ति किस कारण से हो रही है। उनका कहना है कि केवल सैंपल लेने या आश्वासन देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जल वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही शुद्ध पेयजल उपलब्ध नहीं कराया गया तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। वार्डवासियों का कहना है कि प्रशासन को किसी बड़ी स्वास्थ्य समस्या या जनहानि का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि समय रहते दूषित जलापूर्ति की समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।
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