
ग्वालियर: ग्वालियर पुलिस के पड़ाव थाने में पहला ई-मालखाना स्थापित हो चुका है। यह एक ऐसा अत्याधुनिक मालखाना है, जहाँ अब न तो फाइलों में दीमक लगेगी, न सीलन होगी और न ही अंधेरा रहेगा। धूल-मिट्टी वाली फाइलों की जगह अब QR कोड का इस्तेमाल होगा।
ग्वालियर के इस मालखाने में अब रैक में सुसज्जित फाइलें, सबूत और हथियार नजर आएंगे। किसी भी केस की जानकारी के लिए घंटों तक फाइलें नहीं ढूंढनी पड़ेंगी। केवल एक सिंगल क्लिक से जब्त माल और फाइलो की पूरी जानकारी मिल जाएगी कि कौन-सी फाइल कहाँ रखी है। इस प्रकार, फाइल गुम होने या जब्त किए गए सामान के खराब होने की चिंता अब नहीं रहेगी।
इस ई-मालखाने का शुभारंभ ग्वालियर के आईजी अरविंद सक्सेना ने डीआईजी और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में किया। यह मालखाना ग्वालियर-चंबल अंचल के आठों जिलों के पुलिस थानों में पहला ई-मालखाना होगा जिसमें दस्तावेज़ को सुरक्षित तरीके से ऑनलाइन रखा जायेगा।
ई-मालखाने की विशेषताएँ
इस ई-मालखाने की प्रत्येक वस्तु जैसे वाहन, हथियार, मोबाइल आदि पर क्यूआर कोड लगाया गया है। केस की फाइलों पर भी यही क्यूआर कोड है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करने पर केस की पूरी फाइल और जब्त सामान की जानकारी तुरंत मिल जाएगी।
ई-मालखाने का सारा डाटाबेस वेब बेस्ड प्रोग्राम पर उपलब्ध है, जिससे एक क्लिक मात्र से सारी जानकारी कुछ ही सेकंड में उपलब्ध होगी। पुरे मालखाने को सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में रखा गया है ताकि सभी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके।
ग्वालियर एसएसपी धर्मवीर सिंह ने जानकारी दी कि जो केस प्रॉपर्टी होती है वह थाने के मालखाने में रखा जाता है। पहले मालखाने में फाइल्स और जब्त सामान को ढूंढने में कई दिन लग जाते थे। लेकिन अब इन सभी परेशानियों से क्षेत्रीय पड़ाव थाने का मालखाना मुक्त हो गया है। यह ई-मालखाने ग्वालियर के लिए एक सराहनीय पहल हैं।
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