
इंदरगढ़/ संतोष चंसौलिया: इंदरगढ़ क्षेत्र में बीज और कीटनाशक दवाओं की दुकानों को लेकर किसानों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि जब कृषि विभाग या प्रशासन की टीम दुकानों का निरीक्षण करने पहुंचती है तो कुछ दुकानदार शटर गिराकर मौके से चले जाते हैं। इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर निरीक्षण की भनक लगते ही दुकानदार दुकानें बंद कर क्यों भागते हैं? क्या दुकानों में नकली या एक्सपायरी सामग्री रखी है या फिर दस्तावेजों में कोई कमी है?
बार बार होने वाले निरीक्षण और उसके बाद कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से किसानों और आम लोगों में कृषि विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निरीक्षण के बाद कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
स्थानीय सूत्रों और किसानों का आरोप है कि टीम के पहुंचते ही कुछ दुकानदार दुकानें बंद कर देते हैं। इसके बाद अधिकारियों और दुकानदारों के बीच कथित तौर पर बातचीत के बाद मामला शांत हो जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
किसानों का कहना है कि यदि निरीक्षण के दौरान अनियमितताएं मिलती हैं तो कार्रवाई और उसके परिणाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए। उनका आरोप है कि कई मामलों में ठोस कार्रवाई नजर नहीं आती और कुछ समय बाद वही दुकानें दोबारा पहले की तरह संचालित होने लगती हैं।
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किसानों की सबसे बड़ी चिंता नकली बीज और दवाओं को लेकर
इंदरगढ़ क्षेत्र धान उत्पादन के लिए जाना जाता है। क्षेत्र में खाद, बीज और कीटनाशक दवाओं की बड़ी संख्या में दुकानें संचालित हैं। किसानों का आरोप है कि कई बार उन्हें ऐसे बीज दिए गए, जिनमें अपेक्षित अंकुरण नहीं हुआ। इसके बाद किसानों को दोबारा बीज खरीदना पड़ा, जिससे उनकी लागत और मेहनत दोनों बढ़ गई।
किसानों का यह भी आरोप है कि कुछ दुकानदार कृषि दवाओं के उपयोग को लेकर बिना पर्याप्त जानकारी के सलाह देते हैं और किसानों को महंगी दवाएं बेचते हैं। इससे फसल पर असर पड़ने के साथ किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
मनमाने दाम वसूलने का भी आरोप
किसानों ने कुछ दुकानदारों पर दवाओं और अन्य कृषि सामग्री के दामों में मनमानी करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि कई बार उन्हें निर्धारित कीमत से अधिक दाम पर उत्पाद दिए जाते हैं। उधार पर सामान लेने वाले किसानों से अतिरिक्त राशि वसूलने की शिकायतें भी सामने आती हैं।
किसानों का कहना है कि ग्रामीण और कम पढ़े लिखे किसान अक्सर उत्पाद की गुणवत्ता, लाइसेंस और कीमत से जुड़ी जानकारी की पूरी जांच नहीं कर पाते। ऐसे में उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
सैंपलिंग की प्रक्रिया पर भी पारदर्शिता की मांग
कृषि विभाग की ओर से समय समय पर बीज और कीटनाशक दवाओं के सैंपल लिए जाते हैं। किसानों का कहना है कि सैंपल जांच के बाद रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती। यदि किसी उत्पाद का सैंपल फेल होता है तो संबंधित विक्रेता के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी भी सार्वजनिक होनी चाहिए।
किसानों का आरोप है कि कई बार लाइसेंस निरस्त किए जाने की बात सामने आती है, लेकिन इसके बावजूद संबंधित दुकानें दोबारा संचालित होती दिखाई देती हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन से प्रभावी निगरानी और कार्रवाई की मांग की जा रही है।
किसानों ने की कठोर कार्रवाई की मांग
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किसानों और आम नागरिकों का कहना है कि केवल निरीक्षण और सैंपलिंग तक कार्रवाई सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि किसी दुकान से नकली, अमानक या एक्सपायरी बीज और दवाएं मिलती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
अब सवाल यह है कि कृषि विभाग और प्रशासन किसानों की शिकायतों की गंभीरता से जांच करते हैं या मामला केवल निरीक्षण और सैंपलिंग तक सीमित रहता है। किसानों की मांग है कि जांच रिपोर्ट और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए, ताकि नकली बीज और अमानक कृषि दवाओं के कारोबार पर प्रभावी रोक लग सके।
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