
मद्रास: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने शुक्रवार को आईआईटी मद्रास में विकसित दो महत्वपूर्ण स्वदेशी सिलिकॉन फोटोनिक्स तकनीकों प्रोसेस डिज़ाइन किट (PDK) और यूनिवर्सल प्रोग्रामेबल फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट (PPIC) टेस्ट इंजन का शुभारंभ किया। यह पहल भारत की टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
ये दोनों समाधान मंत्रालय द्वारा समर्थित सीओई-सीपीपीआईसीएस केंद्र में विकसित किए गए हैं। पीडीके में 50 से अधिक सत्यापित कंपोनेंट शामिल हैं, जो उद्योग, स्टार्टअप, शैक्षणिक संस्थानों और रक्षा संगठनों को उन्नत फोटोनिक चिप डिजाइन में मदद करेंगे। वहीं यूनिवर्सल पीपीआईसी टेस्ट इंजन फोटोनिक और ऑप्टोइलेक्ट्रॉनिक मॉड्यूल के परीक्षण के लिए एक अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म है।
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मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव और इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के सीईओ अमितेश सिन्हा ने बताया कि इस तकनीक के उपयोग क्लासिकल और क्वांटम दोनों क्षेत्रों में हैं और भविष्य में इसे ISM 2.0 के तहत और विकसित किया जाएगा। उन्होंने सिलिकॉन फोटोनिक्स फैब स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर एस. कृष्णन ने कहा कि भारत सिलिकॉन फोटोनिक्स में वैश्विक स्तर की तकनीक की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वहीं परियोजना से जुड़े प्रोफेसर बिजय कृष्णा दास ने बताया कि जल्द ही केंद्र फोटोनिक्स फैब्रिकेशन, परीक्षण और पैकेजिंग की समेकित सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।
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