
खंडवा।आदि मिश्रा| कलेक्टर की जनसुनवाई में मंगलवार को अनोखा विरोध देखने को मिला। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर एक युवक को डॉग की वेशभूषा पहनाकर जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक और नसबंदी अभियान में कथित अनियमितताओं को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। राठौर ने मामले की जांच की मांग की है।
आवारा कुत्तों के मुद्दे पर किया अनोखा प्रदर्शन
दीपक राठौर ने आवारा कुत्तों की समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने के लिए अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया। उनके साथ आया युवक डॉग की वेशभूषा में था। इस दौरान उन्होंने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और लोगों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया।
राठौर ने कहा कि शहर में आवारा कुत्तों के कारण लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। उन्होंने प्रशासन से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की।
नसबंदी अभियान पर उठाए सवाल
नगर निगम नेता प्रतिपक्ष ने आवारा कुत्तों की नसबंदी को लेकर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि पिछले चार वर्षों में नसबंदी अभियान पर करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम नहीं हुई।
राठौर ने नसबंदी अभियान में कथित वित्तीय और तकनीकी अनियमितताओं की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि खर्च की गई राशि और अभियान के वास्तविक परिणामों की समीक्षा होनी चाहिए।
वित्तीय और तकनीकी जांच की मांग
जनसुनवाई के दौरान सौंपे गए ज्ञापन में पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई। राठौर का कहना है कि यदि बड़ी राशि खर्च होने के बाद भी समस्या बनी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से नसबंदी अभियान में हुए खर्च, काम की गुणवत्ता और वास्तविक संख्या से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
प्रशासन ने सुनी शिकायत
जनसुनवाई में अपर कलेक्टर काशीराम बडोले भी मौजूद रहे। प्रशासन की ओर से शिकायत और ज्ञापन को सुना गया। मामले में संबंधित विभाग से जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई किए जाने की संभावना है।
आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर शहर में पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में इस अनोखे विरोध ने मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।
खंडवा में आवारा कुत्तों की समस्या और नसबंदी अभियान में कथित अनियमितताओं को लेकर नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने अनोखे तरीके से विरोध जताया। उन्होंने प्रशासन से करीब 40 लाख रुपये के खर्च और अभियान के परिणामों की वित्तीय व तकनीकी जांच की मांग की है।
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