
भोपाल: मध्य प्रदेश में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए करीब 19 करोड़ रुपये मूल्य के गेहूं के गायब होने का मामला सामने आने के बाद प्रशासन और राजनीति दोनों में हलचल मच गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार प्रदेश के 16 जिलों से खरीदा गया 7,168 टन गेहूं वेयरहाउस तक पहुंचने से पहले ही गायब हो गया। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जबकि खाद्य मंत्री ने जांच के निर्देश जारी कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, समर्थन मूल्य पर किसानों से खरीदा गया गेहूं खरीद केंद्रों से वेयरहाउस तक पहुंचाया जाना था, लेकिन बड़ी मात्रा में अनाज गंतव्य तक नहीं पहुंचा। बताया जा रहा है कि सबसे बड़ा मामला सागर जिले से सामने आया है, जहां लगभग 86 हजार क्विंटल गेहूं के रिकॉर्ड में गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि खरीदी केंद्रों से उठाया गया अनाज निर्धारित वेयरहाउस तक पहुंचा ही नहीं।
मामले के सामने आने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग की है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इतनी बड़ी मात्रा में गेहूं ट्रकों के माध्यम से परिवहन किया गया होगा, इसलिए पूरे मामले की गंभीर जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि परिवहन के दौरान सीसीटीवी निगरानी, दस्तावेज और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं कहां थीं। उन्होंने कहा कि यह जनता के पैसे का मामला है और सरकार को बताना चाहिए कि आखिर गेहूं कहां गया।
इधर, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित जिलों के कलेक्टरों को जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है और जांच में जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विभागीय स्तर पर खरीदी केंद्रों से लेकर परिवहन और वेयरहाउस तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अनाज की गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
- madhya-pradesh-rs19-crore-wheat-missing-msp-procurement-warehouse-investigation








