
मैहर/देवेश शर्मा की रिपोर्ट: मां शारदा की पावन नगरी और महान संगीत सम्राट उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खां की कर्मभूमि मैहर में रविवार को ‘मैहर मल्हार’ कार्यक्रम के साथ संगीत की मधुर स्वर लहरियां गूंज उठीं। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और संगीत प्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन का उद्देश्य स्थानीय युवा प्रतिभाओं को मंच प्रदान करना तथा मैहर की समृद्ध संगीत परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना रहा।
मैहर का नाम भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया में विशेष पहचान रखता है। यही वह भूमि है, जहां उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खां ने अपनी साधना से संगीत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनके अनेक शिष्यों ने पद्म विभूषण और पद्म भूषण जैसे राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त कर देश-दुनिया में मैहर घराने का गौरव बढ़ाया। बाबा द्वारा विकसित नल तरंग जैसे वाद्ययंत्र भी आज विश्वभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। धार्मिक दृष्टि से भी यह भूमि मां शारदा, मुड़िया महाराज और स्वामी नीलकंठ महाराज की तपोभूमि रही है, जिससे संगीत और आध्यात्म का गहरा संबंध जुड़ा हुआ है।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मैहर विधायक श्रीकांत चतुर्वेदी, भाजपा जिला अध्यक्ष कमलेश सुहाने, कलेक्टर विदिशा मुखर्जी तथा पुलिस अधीक्षक अवधेश प्रताप सिंह की उपस्थिति में दीप प्रज्वलित कर किया गया। अतिथियों ने युवा कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि संगीत केवल कला नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत और पहचान है।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय युवा कलाकारों ने गायन, वादन और अन्य संगीत प्रस्तुतियों के माध्यम से अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। उपस्थित दर्शकों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। आयोजन में शास्त्रीय संगीत के साथ स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी सभी का मन मोह लिया।
वक्ताओं ने कहा कि यदि इस तरह के आयोजन नियमित रूप से होते रहे तो मैहर की नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा निखारने का बेहतर अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, आवश्यकता केवल उन्हें उचित मंच और मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की है।
कार्यक्रम के दौरान यह भी अपेक्षा व्यक्त की गई कि जिला प्रशासन भविष्य में भी ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को निरंतर प्रोत्साहित करे, ताकि मैहर की संगीत परंपरा और अधिक सशक्त हो तथा यहां की युवा प्रतिभाएं राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें। ‘मैहर मल्हार’ ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि मां सरस्वती की इस पावन नगरी में संगीत केवल एक कला नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और आस्था का अभिन्न अंग है।
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