
भोपाल: मध्य प्रदेश के किसानों को खरीफ सीजन के ऐन वक्त पर बड़ा झटका लगा है, जहां कृषि विभाग ने पूरे राज्य में उर्वरकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। शासन के इस अचानक आए आदेश के बाद प्रदेश के लगभग 82 लाख किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं, जिन्हें वर्तमान में फसलों की देखरेख के लिए खाद की सख्त आवश्यकता है। कृषि विभाग के अनुसार भारत सरकार के iFMS पोर्टल पर दर्ज डिजिटल रिकॉर्ड और विक्रेताओं के वास्तविक स्टॉक के बीच मिलान करने के उद्देश्य से 14 अगस्त 2026 की शाम 7:00 बजे से पूरे प्रदेश में खाद की बिक्री पूरी तरह से बंद कर दी गई है।
विभाग के आदेश के तहत स्टॉक मिलान की इस अवधि के दौरान मध्य प्रदेश राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्केटिंग फेडरेशन) के विक्रय केंद्रों, प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (पैक्स), एमपी एग्रो के सभी विक्रय केंद्रों और समस्त निजी उर्वरक दुकानों से खाद की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। खरीफ फसलों की बढ़वार के महत्वपूर्ण समय में बिक्री बंद होने से दुकानों से किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। यद्यपि शासन का कहना है कि यह कदम वितरण प्रणाली में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन जब तक जमीनी और पोर्टल का स्टॉक मिलान पूरा नहीं हो जाता, तब तक किसानों को इंतजार करना पड़ेगा।
किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने सभी जिलों को इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, हालांकि विभाग ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि खाद की बिक्री पुनः किस तारीख से शुरू की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले भी खाद वितरण से जुड़ी ‘ई-टोकन व्यवस्था’ के विरोध में किसानों ने बीते 28 और 29 जुलाई को भोपाल में बड़ा आंदोलन किया था, और अब बिक्री पर पूरी तरह रोक लगने से किसानों में असंतोष और गहरा सकता है।
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