मंत्रालय का महापाप… स्वेच्छानुदान में कमीशनखोरी का ‘ डॉ. अरविंद कुमार यादव खेल’: क्या मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री की आँखों पर बंधी है पट्टी?

भारतेंदु हरिश्चंद्र ने सालों पहले एक नाटक लिखा था, जिसकी एक पंक्ति आज मध्य प्रदेश के शासन के गढ़, यानी वल्लभ भवन (मंत्रालय) में अक्षरशः चरितार्थ हो रही है— “अंधेर नगरी, चौपट राजा, टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।” जी हां, आज मध्य प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था इसी अंधेर नगरी में तब्दील हो चुकी है, जहां नियम-कायदे चौपट हैं और गरीबों की जिंदगी की कीमत टके सेर लगा दी गई है। कल बड़वानी समाचार ने आपको दिखाया था कि कैसे गुना के मकसूदनगढ़ में एक बंद पड़े ‘भोपाल सिटी हॉस्पिटल’ के नाम पर फर्जी मरीज खड़े करके लाखों-करोड़ों रुपए डकार लिए गए। आज हम उस चेहरे को बेनकाब करने जा रहे हैं, जिसकी कलम की स्याही से इस महाघोटाले की स्क्रिप्ट लिखी गई। वह नाम है वल्लभ भवन में बैठे मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान के कद्दावर अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार यादव का!

मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान… यह कोई सरकारी खैरात नहीं है। यह उन बेबस, लाचार और निर्धन भाई-बहनों के लिए एक संजीवनी है, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और इस लायक नहीं हैं कि अपनी दवा या ऑपरेशन का खर्च उठा सकें। यह पैसा समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की जान बचाने के लिए है। लेकिन डॉ. अरविंद कुमार यादव के राज में, इस पवित्र फंड को गिद्धों की तरह नोचा जा रहा है। कमीशनखोरी की भूख इस कदर हावी हो चुकी है कि जीवित लोगों को मृतप्राय और स्वस्थ लोगों को गंभीर बीमार बताकर सरकारी खजाना खाली किया जा रहा है।

हम पूछना चाहते हैं कि क्या इस तंत्र को चलाने वालों को भगवान का भी डर नहीं बचा है? क्या हमारी चुनी हुई सरकारों, मुख्यमंत्री जी और मुख्य सचिव, दोनों की आँखें इस कदर बंद हो चुकी हैं कि वल्लभ भवन की नाक के नीचे चल रहा यह ‘ डॉ. अरविंद कुमार यादव खेल’ उन्हें दिखाई नहीं देता?

आइए, साक्ष्यों के साथ देखते हैं इस ‘अंधेर नगरी’ की वह पूरी साक्ष्य डायरी, जिसे डॉ. अरविंद कुमार यादव की देखरेख में पास किया गया।

कमीशनखोरी के चलते जिन फर्जी प्रकलनों (Estimates) को बिना किसी जमीनी और भौतिक सत्यापन के सीधे इंडसइंड बैंक, गुलमोहर शाखा (खाता क्रमांक: 257555070700, IFSC: INDB0001436) में ट्रांसफर करने की मंजूरी दी गई, उनकी सूची इस प्रकार है:

 

 

क्र.सं.

मरीज का नाम (Aadhaar/कागजों के अनुसार)

दिखाई गई बीमारी / उपचार

स्वीकृत/प्रकलित राशि (₹)

साक्ष्य और वास्तविक स्थिति

1.

आशीष भील (पुत्र: जगनारायण भील)

RTA हेड इंजरी एवं उल्ना फ्रैक्चर

95,000/-

कागजों पर भर्ती तिथि 02/01/2025 दिखाई गई।

2.

ममता बाई भील (उम्र: 20 वर्ष)

न्यूमोनाइटिस और प्लूरल एफ्यूजन

75,000/-

विदिशा कलेक्टर आईडी से भुगतान की सफलता (13/05/2025)।

3.

अमर सिंह प्रजापति (उम्र: 45 वर्ष)

सीवियर एनीमिया और ओपन हेमोराइड्स

1,05,000/-

फर्जी प्रकलन संख्या NH/8042 के तहत आवेदन।

4.

प्रवेश मीणा (पुत्र: सुंदर सिंह मीणा)

RTA हेड इंजरी (SDH)

1,30,000/-

उम्र 25 वर्ष दर्शाकर फर्जी केस फाइल तैयार की गई।

5.

धीरप सिंह (पुत्र: मांगीलाल)

RTA HEAD INJURY WITH ULANA FRACTURE

85,000/-

राजगढ़ निवासी, बिना इलाज के नाम का दुरुपयोग।

6.

साक्षी केवट (पुत्री: शोभाराम केवट)

सीवियर सेप्सिस विद ऑब्स्ट्रक्शन

1,25,000/-

सीहोर विधायक सुदेश राय के फर्जी अनुशंसा पत्र का इस्तेमाल।

7.

करण सिंह अहिरवार

अज्ञात जहर का असर (Unknown Poison)

1,05,000/-

कागजों में भर्ती दिखाकर राशि हड़पी गई।

8.

रहीम खान (पुत्र: इकबाल खान)

बी/एल निमोनिया विद एआरएफ (ARF)

1,10,000/-

मुख्यमंत्री कार्यालय से ₹35,000 सीधे अस्पताल खाते में जारी।

9.

कल्याण सिंह गुर्जर

सीवियर सेप्सिस और क्रोनिक लीवर डिसीज

1,15,000/-

बिना अस्पताल आए मेडिकल मैनेजमेंट के नाम पर हेराफेरी।

10.

लाल सिंह अहिरवार

RTA हेड इंजरी विद SDH

1,30,000/-

फर्जी हेड इंजरी का एस्टीमेट वल्लभ भवन भेजा गया।

11.

राकेश सुमन (पुत्र: भेरू लाल)

L3-L4 नर्व कम्प्रेशन

1,10,000/-

बिना किसी न्यूरोसर्जन के आईसीयू का दावा।

12.

राहुल सूर्यवंशी

एक्यूट एब्डोमेन पेन

1,10,000/-

फर्जी ओपीडी/आईपीडी रिकॉर्ड तैयार किया गया।

13.

अजय (पुत्र: बाबूलाल)

राइट MCA इन्फार्क्ट (स्ट्रोक)

1,30,000/-

राजगढ़ कलेक्टर आईडी से ₹1,20,000 का सफल भुगतान प्राप्त।

14.

सूरज मालवीय (पुत्र: रामप्रसाद)

RTA हेड इंजरी एवं शोल्डर डिस्लोकेशन

95,000/-

19 वर्षीय युवक के नाम पर फर्जी क्लेम।

15.

नंदनी जोगी (पुत्री: मुरारीलाल जोगी)

राइट MCA इन्फार्क्ट

1,10,000/-

विधायक सुदेश राय के पत्र पर ₹95,000 का फर्जीवाड़ा।

16.

राहुल सेन (पुत्र: मांगीलाल सेन)

राइट साइड रीनल स्टोन (पथरी)

1,05,000/-

पथरी के इलाज के लिए ₹1.05 लाख का भारी-भरकम फर्जी बिल।

17.

रामचंद लोधी (उम्र: 74 वर्ष)

L3-L4 नर्व कम्प्रेशन

1,15,000/-

बुजुर्ग के दस्तावेज चुराकर राशि का आहरण किया गया।

18.

श्रवण कुशवाहा (पुत्र: बिहारीलाल)

क्रोनिक लीवर डिसीज (अल्कोहलिक)

1,05,000/-

राजगढ़ के निवासी के नाम पर गुना में फर्जी दाखिला।

19.

मोर सिंह बडोनिया (हजारीलाल)

निमोनिया, डेंगू बुखार, पेट में सूजन

1,35,000/-

पीड़ित का बयान: “मैं कभी भर्ती नहीं हुआ, अंगूठा लगवाकर पैसे निकाले गए।”

यह सूची डॉ. अरविंद कुमार यादव के दफ्तर की कार्यप्रणाली पर एक तमाचा है। दिनेश अहिरवार और मोर सिंह बडोनिया जैसे सीधे-साधे ग्रामीण जब न्याय के लिए चीख रहे हैं, तब वल्लभ भवन के ये ‘सफेदपोश साहब’ अपनी फाइलों को दबाने में जुटे हैं। जब शिकायतें बढ़ीं, तो अस्पताल के डायरेक्टरों—मृदुल सक्सेना और शुभम पाल ने अधिकारियों से सेटिंग कर रातों-रात बोर्ड बदलकर ‘स्वास्तिक अस्पताल’ कर दिया। नाम बदल गया, लेकिन क्या गुनाह धुल गए?

ब्रांडवाणी समाचार आज सीधे सूबे के मुखिया और मुख्य सचिव से सवाल करता है:

  • क्या डॉ. अरविंद कुमार यादव की कुर्सी इतनी मज़बूत है कि उन पर कानून का हाथ नहीं डाल सकता?
  • स्वेच्छानुदान के नाम पर होने वाली इस ‘प्रतिशत और कमीशन’ की प्रथा को रोकने के लिए मंत्रालय के पास क्या जवाब है?
  • क्या इस पूरे नेक्सस की जांच तत्काल लोकायुक्त, ईओडब्ल्यू (EOW) या किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी को नहीं सौंपी जानी चाहिए?

जनता जाग चुकी है और समाज की आँखें अब बंद नहीं रहेंगी। बड़वानी समाचार इस ‘यादव खेल’ के हर एक मोहरे को बेनकाब करने तक अपनी मुहीम जारी रखेगा। जब तक गरीबों के हक पर डाका डालने वाले ये अधिकारी और नकली डॉक्टर जेल की सलाखों के पीछे नहीं जाते, हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

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gaurav singh rajput

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