
भिंड: मध्यप्रदेश राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष डॉ. कैलाश जाटव ने अपने दो दिवसीय भिंड प्रवास के दूसरे दिन जिला प्रशासन, पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में उन्होंने अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याण के लिए संचालित विभिन्न शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक समय पर पहुंचे, यह सुनिश्चित करना सभी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। अनुसूचित जाति वर्ग के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव या शासकीय दायित्वों में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के दौरान डॉ. जाटव ने निर्देश दिए कि जिले के राजस्व एवं डीएमएफ मद का 18 प्रतिशत व्यय अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों में किया जाए। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के पट्टाधारकों को बिना नोटिस हटाने जैसी कार्रवाई न की जाए तथा अवैध रजिस्ट्रियों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। नामांतरण से जुड़े प्रकरणों का 15 दिनों के भीतर निराकरण करने के निर्देश देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित राजस्व अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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उन्होंने सभी विभागों में आरक्षण रोस्टर का पालन सुनिश्चित करने, अनुसूचित जाति वर्ग के लंबित अनुकंपा नियुक्ति प्रकरणों का शीघ्र निराकरण करने तथा अनुसूचित जाति वर्ग के शासकीय कर्मचारियों की गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) जानबूझकर खराब करने जैसी शिकायतों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि सीएम हेल्पलाइन की शिकायतें बंद कराने के लिए अनुसूचित जाति वर्ग के शिकायतकर्ताओं पर किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाया जाए तथा जनसुनवाई में उनकी शिकायतों का प्राथमिकता से समाधान किया जाए।
बैठक में छात्रावासों, छात्रवृत्ति, कौशल विकास, रोजगारपरक योजनाओं, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश, साइकिल वितरण, आवास एवं श्रमिक कल्याण जैसी योजनाओं की भी विस्तृत समीक्षा की गई। डॉ. जाटव ने छात्रावासों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, सुरक्षा व्यवस्था, छात्राओं के लिए सुरक्षा गार्ड, कमरों में जाली लगाने तथा मूलभूत सुविधाओं में सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने सभी छात्रावास अधीक्षकों को ऑडिट, खाद्यान्न भंडारण एवं अभिलेख संधारण का प्रशिक्षण देने तथा प्रत्येक छात्रावास के लिए एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश भी दिए। साथ ही अभिभावकों से समय-समय पर छात्रावासों के भोजन का आकस्मिक निरीक्षण कराने की बात कही।
डॉ. जाटव ने निर्देश दिए कि आंगनवाड़ी केंद्रों सहित किसी भी शासकीय संस्था में जातिगत भेदभाव की शिकायत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों एवं छात्रावासों में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण शिविर लगाने के निर्देश दिए। आयोग के समक्ष जिले से संबंधित लंबित 42 शिकायतों पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने उनका शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में नशा मुक्ति अभियान चलाने, खाद्यान्न पर्चियों की संख्या बढ़ाने तथा संबल योजना के तहत अंत्येष्टि सहायता राशि का समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पंचायत एवं नगरीय निकायों के अधिकारियों के साथ बैठक में उन्होंने अनुसूचित जाति बाहुल्य बस्तियों में सड़क, नाली, पेयजल, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने विभागीय बजट का 18 प्रतिशत हिस्सा इन बस्तियों के विकास कार्यों पर खर्च करने, स्वीकृत सीसी रोड, नाला निर्माण, सामुदायिक भवन, हैंडपंप सफाई एवं हर घर जल योजना के कार्यों का भौतिक सत्यापन कर फोटो सहित प्रतिवेदन आयोग को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने वीबीजी-राम-जी योजना के तहत अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्रों में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने और इन कार्यों में अनुसूचित जाति वर्ग के मजदूरों को अनुपातिक रोजगार उपलब्ध कराने पर भी बल दिया।
अपने दौरे के दौरान डॉ. कैलाश जाटव ने पुलिस प्रशासन के साथ भी बैठक कर अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़े कानून-व्यवस्था के मामलों की समीक्षा की। बैठक में सीईओ जिला पंचायत, अपर कलेक्टर, एसडीएम भिंड, डिप्टी कलेक्टर सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।
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