
छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के विरोध में आदिवासी परिवारों का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रदर्शनकारी महिलाएं और ग्रामीण प्रतीकात्मक चिता पर लेटकर, गले में फंदा डालकर और नदी में खड़े होकर विरोध दर्ज करा रहे हैं। उनका कहना है कि यह आंदोलन मुआवजे, पुनर्वास और अपनी जमीन बचाने की मांग को लेकर किया जा रहा है।
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मांगें?
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि परियोजना के कारण उनकी कृषि भूमि, जंगल और आजीविका प्रभावित होगी। उनका कहना है कि कई प्रभावित परिवारों को अब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिला है। प्रदर्शनकारी यह भी आरोप लगा रहे हैं कि कुछ प्रभावित परिवारों के नाम पुनर्वास सूची में शामिल नहीं किए गए हैं।
सरकार का क्या कहना है?
केन-बेतवा लिंक परियोजना को देश की पहली नदी जोड़ो परियोजना माना जाता है। सरकार का कहना है कि करीब 44,605 करोड़ रुपये की इस परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई, 62 लाख लोगों को पेयजल और 130 मेगावाट बिजली उत्पादन का लाभ मिलेगा। यह परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में जल संकट कम करने के उद्देश्य से बनाई जा रही है।
विकास बनाम विस्थापन की बहस
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना पूर्ण पुनर्वास और न्यायसंगत मुआवजे के विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे। दूसरी ओर, प्रशासन परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बता रहा है। फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत और विरोध प्रदर्शन जारी है।
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