
उमरिया।राकेश दर्दवंशी| मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) को लेकर विवाद सामने आया है। करकेली विकासखंड के कई गांवों के ग्रामीणों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर आरोप लगाया कि पात्र हितग्राहियों को योजना से बाहर कर दिया गया, जबकि अपात्र लोगों को कथित रूप से रिश्वत लेकर लाभ दिया गया। मामले में कलेक्टर ने जांच के निर्देश दिए हैं।
पात्रों को अपात्र और अपात्रों को लाभ देने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन लोगों के पास पहले से दो-दो मंजिला पक्के मकान हैं, उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया। वहीं, कई ऐसे परिवार जो वर्षों से कच्चे और जर्जर मकानों में रह रहे हैं, उन्हें अपात्र घोषित कर सूची से बाहर कर दिया गया।
रिश्वत मांगने के लगाए गंभीर आरोप
शिकायतकर्ताओं का दावा है कि पंचायत स्तर पर कथित रूप से रिश्वत की मांग की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि जिन्होंने पैसे दिए, उनके नाम पात्र सूची में शामिल कर दिए गए, जबकि रिश्वत नहीं देने वाले लोगों को योजना के लाभ से वंचित कर दिया गया। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और वास्तविक पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाने की मांग की है।
कलेक्टर ने दिए जांच के निर्देश
मामले को गंभीरता से लेते हुए उमरिया कलेक्टर ने शिकायतों की जांच जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को सौंप दी है।
सीईओ बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई
जिला पंचायत सीईओ अभय सिंह ओहरी ने प्रारंभिक तौर पर आरोपों को निराधार बताया है। हालांकि उन्होंने कहा कि प्राप्त शिकायतों की नियमानुसार जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या दोषी अधिकारी-कर्मचारी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। ग्रामीणों के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
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