
सागर: मध्य प्रदेश ने इस बार गेहूं उपार्जन में नया रिकॉर्ड बनाते हुए देश में पहला स्थान हासिल किया है। राज्य में अब तक 13 लाख 36 हजार किसानों से 103 लाख 48 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हो चुकी है। इस अभियान में छोटे और सीमांत किसानों की बड़ी भागीदारी रही है, जिनकी संख्या ही 8 लाख से ज्यादा बताई जा रही है। यह खरीदी अभी भी कई जगहों पर जारी है, इसलिए आंकड़े और बढ़ने की संभावना है।
सरकारी स्तर पर इसे पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा उपार्जन बताया जा रहा है। खाद्य मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के मुताबिक शुरुआत में गेहूं खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन था, जिसे बढ़ाकर 100 लाख मीट्रिक टन किया गया, लेकिन किसानों की मेहनत और व्यवस्था के चलते यह लक्ष्य भी पार हो गया।
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किसानों को इस बार 2,585 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी के साथ 40 रुपये बोनस मिलाकर कुल 2,625 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है। अब तक किसानों के खातों में 22 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है। सरकार का कहना है कि उपार्जन व्यवस्था को आसान बनाने के लिए कई बदलाव किए गए हैं, जैसे तौल कांटों की संख्या बढ़ाना, समय सीमा रात तक बढ़ाना और मंडियों को हफ्ते में छह दिन चालू रखना।
इसके अलावा केंद्रों पर पानी, छाया और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं ताकि किसानों को परेशानी न हो। किसानों की सुविधा को देखते हुए उपार्जन की अंतिम तारीख भी बढ़ाकर 28 मई कर दी गई है। कुल मिलाकर इस बार का गेहूं उपार्जन अभियान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है, जिसे राज्य सरकार बड़ी उपलब्धि के तौर पर देख रही है।
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