
नरवर/ कुलदीप शर्मा: विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नरवर दुर्ग की कचहरी महल से चोरी हुई ऐतिहासिक तोप की बरामदगी और दुर्ग की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग को लेकर शुक्रवार को नरवर प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार नरवर को ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन से जुड़े निजी विद्यालयों के संचालकों और शिक्षकों ने घटना पर रोष जताते हुए ऐतिहासिक तोप की जल्द बरामदगी, चोरी में शामिल आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और नरवर दुर्ग की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि नरवर दुर्ग केवल नरवर की पहचान नहीं, बल्कि देश की गौरवशाली ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हजारों वर्षों के इतिहास को समेटे यह दुर्ग वीरता, शौर्य, संस्कृति और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है। यहां देश-विदेश से पर्यटक और इतिहास प्रेमी पहुंचते हैं।
‘ऐतिहासिक धरोहर पर सीधा आघात’
एसोसिएशन ने कहा कि दुर्ग से ऐतिहासिक तोप की चोरी केवल एक वस्तु की चोरी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय धरोहर और सांस्कृतिक विरासत पर सीधा आघात है। संगठन ने आशंका जताई कि यदि समय रहते सुरक्षा व्यवस्था मजबूत नहीं की गई तो भविष्य में अन्य ऐतिहासिक धरोहरें भी खतरे में पड़ सकती हैं।
ज्ञापन के माध्यम से चोरी हुई तोप को जल्द बरामद करने और घटना में शामिल सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
CCTV और 24 घंटे निगरानी की मांग
एसोसिएशन ने नरवर दुर्ग परिसर में उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे लगाने, प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मियों की नियमित तैनाती, 24 घंटे निगरानी और रात्रिकालीन गश्त की व्यवस्था करने की मांग की। इसके साथ ही दुर्ग के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई।
संगठन ने नरवर दुर्ग सहित क्षेत्र की अन्य पुरातात्विक और ऐतिहासिक धरोहरों का सर्वे कर उनके संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए स्थायी कार्ययोजना बनाने की मांग भी की।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे स्कूल संचालक और शिक्षक
ज्ञापन सौंपने के दौरान प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन अध्यक्ष नवीन जैन, सचिव शुभम जैन, संरक्षक धीरज गुप्ता, प्रशांत त्रिपाठी, नीरज भार्गव, पंकज कुशवाहा, ताहिर अली और राधे रावत सहित विभिन्न निजी विद्यालयों के संचालक और शिक्षक मौजूद रहे।
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एसोसिएशन पदाधिकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहरें किसी एक क्षेत्र की नहीं, बल्कि पूरे देश की अमूल्य विरासत हैं। इनके संरक्षण और सुरक्षा की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन के साथ समाज की भी है।
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