
राजगढ़: मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई सामने आई। भोपाल लोकायुक्त की टीम ने CMHO डॉ. शोभा पटेल को 20 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। यह मामला एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर में डॉक्टर का नाम जोड़ने की अनुमति से जुड़ा था, जिसमें पहले एक लाख रुपये की मांग की गई थी।
कैसे हुआ पूरा रिश्वत का खेल उजागर?
भोपाल निवासी हरिओम अहिरवाल राजगढ़ में एक डायग्नोस्टिक सेंटर संचालित करते हैं। उनका आरोप है कि CMHO ने सेंटर में डॉक्टर का नाम जोड़ने के लिए पहले 1 लाख रुपये की मांग की। बाद में यह सौदा 50 हजार रुपये में तय हुआ। आवेदक के अनुसार, 30 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे और बाकी 20 हजार रुपये के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा था। जब मांग बढ़ती गई और काम लंबित रहा, तब आवेदक ने लोकायुक्त से शिकायत की, जिससे पूरा मामला सामने आया।
लोकायुक्त की ट्रैप कार्रवाई कैसे हुई?
शिकायत के सत्यापन के बाद लोकायुक्त टीम ने योजना बनाकर ट्रैप कार्रवाई की। पुलिस अधीक्षक दुर्गेश कुमार राठौर के निर्देश पर विशेष टीम बनाई गई। योजना के तहत आवेदक को 20 हजार रुपये लेकर CMHO के पास भेजा गया। जैसे ही डॉ. शोभा पटेल ने पैसे लिए, टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया। इस कार्रवाई में डीएसपी वीरेंद्र सिंह, आशीष भट्टाचार्य और अन्य अधिकारियों की अहम भूमिका रही। यह पूरी कार्रवाई जिला अस्पताल परिसर स्थित सरकारी क्वार्टर में की गई।
अब आगे क्या होगा? कानून और कार्रवाई
लोकायुक्त ने CMHO के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा-7 के तहत मामला दर्ज किया है। अब आगे की जांच में यह देखा जाएगा कि इस मामले में और कौन-कौन शामिल है और क्या इससे जुड़े अन्य मामले भी सामने आते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि स्वास्थ्य विभाग में इस तरह के मामले सामने आना गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह सीधे आम जनता की सेवाओं को प्रभावित करता है।
राजगढ़ में हुई यह कार्रवाई एक बड़ा संदेश देती है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती लगातार जारी है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाई जाए।
- rajgarh-cmho-bribe-case-lokayukta-action









