
सागर: पं. दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य (अग्रणी) महाविद्यालय, सागर में 15 एवं 16 जुलाई 2026 को ‘एकात्म मानव दर्शन : विकसित भारत-2047’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। यह आयोजन पीएम-उषा ( परियोजना के अंतर्गत राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा किया जा रहा है। संगोष्ठी का उद्देश्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन के सिद्धांतों के आधार पर विकसित भारत-2047 की अवधारणा पर राष्ट्रीय स्तर पर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना है।
महाविद्यालय की प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता के संरक्षण में आयोजित इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को रानी अवन्तीबाई लोधी राजकीय विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. विनोद मिश्र तथा उच्च शिक्षा विभाग सागर संभाग के क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक डॉ. नीरज दुबे का मार्गदर्शन प्राप्त है। आयोजन महाविद्यालय के आदिगुरु शंकराचार्य सभागार में होगा, जिसमें देशभर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों के प्राध्यापक, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ भाग लेंगे। संगोष्ठी की संयोजक एवं राजनीति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. संगीता मुखर्जी ने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों के आलोक में विकसित भारत के लक्ष्य पर व्यापक चर्चा करना है। उन्होंने बताया कि देशभर के शिक्षाविदों और शोधार्थियों को शोध पत्र प्रस्तुत करने के लिए आमंत्रित किया गया है।
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पीएम-उषा परियोजना प्रभारी डॉ. इमराना सिद्दीकी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। प्राचार्य प्रो. सरोज गुप्ता ने आयोजन समिति की बैठक लेकर विभिन्न समितियों का गठन किया है। कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए महाविद्यालय के शैक्षणिक एवं कार्यालयीन कर्मचारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। संगोष्ठी की समन्वयक डॉ. प्रतिभा जैन के अनुसार इस राष्ट्रीय आयोजन में सुशासन, लोकतंत्र एवं लोककल्याणकारी राज्य, आत्मनिर्भर भारत और समावेशी विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं नैतिकता, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं भारतीय ज्ञान परंपरा तथा महिला सशक्तिकरण एवं कौशल विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।
सह-संयोजक डॉ. संदीप सबलोक ने बताया कि शोध पत्र एवं सारांश जमा करने की अंतिम तिथि 12 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक प्रतिभागी ऑनलाइन पंजीकरण कर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में भाग ले सकते हैं। शोध पत्र निर्धारित ईमेल आईडी पर भेजे जा सकते हैं। आयोजन सचिव अरविंद चतुर्वेदी सहित पूरी आयोजन समिति इस राष्ट्रीय संगोष्ठी को सफल बनाने के लिए तैयारियों में जुटी हुई है। आयोजकों का मानना है कि यह कार्यक्रम शोधार्थियों, विद्यार्थियों और शिक्षाविदों के लिए विचार-विमर्श का महत्वपूर्ण मंच साबित होगा तथा विकसित भारत-2047 की अवधारणा को अकादमिक दृष्टि से नई दिशा देगा।
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