
सागर/ मनीष कुमार चौबे: सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली जनहानि को रोकने और जिले में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सागर कलेक्टर कार्यालय सभागार में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता उच्चतम न्यायालय की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने की।
बैठक में जस्टिस सप्रे ने कहा कि सड़क हादसों में मौतों का आंकड़ा शून्य करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं ईश्वर की मर्जी नहीं, बल्कि मानवीय और तकनीकी चूकों का परिणाम होती हैं। बेहतर प्रबंधन, यातायात नियमों का सख्ती से पालन और समय पर बुनियादी ढांचे में सुधार कर हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
सागर को रोड सेफ्टी का मॉडल जिला बनाने पर जोर
जस्टिस सप्रे ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों और ब्लैक स्पॉट्स पर किए गए सुधारात्मक कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि समय पर किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर सुधारों से दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने जिले में बचे हुए ब्लैक स्पॉट्स पर भी तत्काल सुधार कार्य पूरा करने और सागर को प्रदेश एवं देश के लिए आदर्श रोड सेफ्टी मॉडल बनाने का आह्वान किया।
बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल, पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
अनधिकृत मीडियन कट बनाने वालों पर FIR
बैठक में निर्णय लिया गया कि राजमार्गों पर बिना अनुमति बनाए गए अनधिकृत मीडियन कट के मामलों में संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी। अधिकारियों को सड़क सुरक्षा मानकों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
हर जानलेवा हादसे का होगा ‘डेथ रिव्यू’
जिले में होने वाली प्रत्येक जानलेवा सड़क दुर्घटना की समीक्षा के लिए डेथ रिव्यू कमेटी गठित करने के निर्देश दिए गए हैं। कमेटी हादसे के कारण, स्थान, समय और हेलमेट या सीटबेल्ट के इस्तेमाल जैसे बिंदुओं का विश्लेषण करेगी, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।
इसके साथ ही दुर्घटना पीड़ितों को गोल्डन ऑवर में उपचार उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस के रिस्पॉन्स टाइम को कम करने के निर्देश दिए गए।
ड्रंक एंड ड्राइव और ओवरस्पीडिंग पर विशेष अभियान
शराब पीकर वाहन चलाने वालों की ब्रेथ एनालाइजर से नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए। ओवरस्पीडिंग और ओवरलोडिंग के खिलाफ भी विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा जिले की सड़कों पर मौजूद गड्ढों का सर्वे कर तत्काल मरम्मत कराने और निर्माणाधीन सड़कों में बेहतर डिजाइन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
‘नो हेलमेट-नो अटेंडेंस’ और ‘नो हेलमेट नो फ्यूल’ पर चर्चा
सड़क सुरक्षा को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने के लिए कई व्यावहारिक सुझावों पर भी चर्चा हुई। जिले के सरकारी कर्मचारियों के लिए दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनना अनिवार्य करने और बिना हेलमेट कार्यालय आने पर उपस्थिति दर्ज नहीं करने का सुझाव दिया गया।
इसके अलावा अगले दो महीनों में पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट पेट्रोल नहीं देने की व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
152 दुर्घटना संभावित स्थलों के सुधार के निर्देश
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सेवलाइफ फाउंडेशन द्वारा सागर जिले में चिन्हित 152 दुर्घटना संभावित स्थलों और NH 44 के ब्लैक स्पॉट्स को दुरुस्त करने के निर्देश PWD, NHAI और MPRDC को दिए गए हैं। मध्य प्रदेश के छह अति संवेदनशील जिलों सागर, धार, सतना, रीवा, जबलपुर और खरगोन में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
प्रशासन ने आम नागरिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों से सड़क सुरक्षा को जनआंदोलन बनाने की अपील की है। लोगों से ISI मार्क हेलमेट पहनने, सीटबेल्ट लगाने और यातायात नियमों का पालन करने का आग्रह किया गया।
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