
सागर: भक्ति, आस्था और दृढ़ संकल्प का अनूठा उदाहरण रविवार 30 मार्च को सागर जिले के गौरझामर में देखने को मिला, जब नगर के प्रतिष्ठित परिवार मेहरबान सिंह (मडिया वाले) के सुपुत्र और स्वर्गीय डॉ. डी. सिंह के पोते आयुष और तनिष्क ने लगभग 3000 किलोमीटर की कठिन पैदल नर्मदा परिक्रमा सफलतापूर्वक पूरी कर अपने गृह नगर वापसी की। करीब पांच माह की इस लंबी और तपस्या से भरी यात्रा के बाद जैसे ही दोनों युवक नगर पहुंचे, पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बन गया।
आयुष और तनिष्क की घर वापसी पर गौरझामर के नागरिकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। ढोल-नगाड़ों और “नर्मदे हर” के जयघोष के बीच नगरवासियों ने फूल-मालाओं से दोनों युवाओं का अभिनंदन किया और श्रीफल भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर परिजनों की आंखें भी नम दिखाई दीं, क्योंकि युवावस्था में जहां अधिकतर युवा आधुनिक जीवन की ओर आकर्षित होते हैं, वहीं इन दोनों भाइयों ने अध्यात्म और तपस्या का मार्ग चुनकर एक अलग उदाहरण प्रस्तुत किया।
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क्षेत्रीय विधायक बृज बिहारी पटेरिया ने भी दोनों युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि आज के दौर में युवाओं के भीतर धर्म और अध्यात्म के प्रति ऐसी आस्था देखना बेहद प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि आयुष और तनिष्क ने न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे गौरझामर क्षेत्र का नाम गौरवान्वित किया है और मां रेवा का आशीर्वाद उन पर सदैव बना रहे।
मां नर्मदा की परिक्रमा हिंदू धर्म में सबसे कठिन और पुण्यदायी यात्राओं में से एक मानी जाती है। आयुष और तनिष्क ने करीब 150 दिनों तक लगातार पैदल चलकर इस पवित्र यात्रा को पूरा किया। कड़कड़ाती ठंड, लंबे और दुर्गम रास्तों तथा कई कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए दोनों युवाओं ने अपने अटूट विश्वास और संकल्प के बल पर यह यात्रा पूर्ण की।
उनकी सकुशल वापसी से पूरे नगर में हर्ष का माहौल है। नगरवासियों का कहना है कि यह केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि गौरझामर की नई पीढ़ी के संस्कारों और संस्कृति से जुड़ाव का प्रतीक भी है। क्षेत्र के लोगों ने मेहरबान सिंह के परिवार को बधाई देते हुए आयुष और तनिष्क के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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