
प्रदेश के एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी इन दिनों अपने प्रशासनिक फैसलों से अधिक शेयर बाजार में कथित रुचि को लेकर चर्चा में हैं। विभागीय गलियारों में यह बात आम हो गई है कि साहब की सुबह की शुरुआत मॉर्निंग वॉक के साथ-साथ बाजार की गतिविधियों पर नजर रखने से होती है। बताया जाता है कि वॉक के दौरान भी उनका मोबाइल फोन लगातार सक्रिय रहता है और निवेश से जुड़े लोगों के साथ बातचीत का सिलसिला जारी रहता है। चर्चा यह भी है कि किस शेयर में निवेश करना है, किसे होल्ड करना है और किससे दूरी बनानी है, जैसे विषय अक्सर उनकी बातचीत का हिस्सा बने रहते हैं।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारी को शेयर बाजार के नियमों और निवेश संबंधी जानकारी का अच्छा अनुभव माना जाता है। यही वजह है कि उनके आसपास रहने वाले कई लोग भी बाजार की दिशा को लेकर उनसे राय लेने में रुचि दिखाते हैं। हालांकि यह केवल चर्चाओं और दावों का विषय है, जिसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी विभाग में यह धारणा बन चुकी है कि साहब की रुचि प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ निवेश जगत में भी बराबर बनी हुई है।
कर्मचारियों के बीच एक और चर्चा यह है कि बाजार की चाल का असर उनके व्यवहार और मनोदशा पर भी दिखाई देता है। कहा जाता है कि जब शेयर बाजार में तेजी रहती है तो उनका मूड भी काफी सकारात्मक नजर आता है और दफ्तर का माहौल अपेक्षाकृत सहज रहता है। वहीं, बाजार में गिरावट या लाल निशान दिखाई देने पर उनके स्वभाव में बदलाव महसूस किया जाता है। हालांकि इन दावों का कोई ठोस आधार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन विभागीय चर्चाओं में यह विषय लगातार जगह बनाए हुए है।
कार्यालय में काम करने वाले कुछ कर्मचारियों का कहना है कि बाजार की स्थिति चाहे जैसी भी हो, उसका प्रभाव कभी-कभी दफ्तर के वातावरण पर महसूस किया जा सकता है। यही कारण है कि इन दिनों वरिष्ठ अधिकारी की निवेश संबंधी रुचि और शेयर बाजार से जुड़ी गतिविधियां चर्चा का प्रमुख विषय बनी हुई हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी की कार्यशैली को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, लेकिन विभाग के भीतर यह मुद्दा लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।
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