‘तीन महीने में पूरा करो, फिर छुट्टी जाओ’— वरिष्ठ अफसर की एक टिप्पणी बनी चर्चा का विषय

प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों किसी नई नियुक्ति, तबादले या बड़े फैसले से अधिक चर्चा एक वरिष्ठ अधिकारी के कथित बयान की हो रही है। मामला हाल ही में आयोजित एक समीक्षा बैठक से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां विभिन्न योजनाओं और विभागीय कार्यों की प्रगति पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान वरिष्ठ अधिकारी ने एक ऐसा वाक्य कहा, जिसने बैठक खत्म होने के बाद भी चर्चाओं का सिलसिला थमने नहीं दिया। अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच अब उस टिप्पणी के अलग-अलग अर्थ निकाले जा रहे हैं।

बताया जाता है कि बैठक के दौरान कार्यों की धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए अधिकारी ने कहा कि लंबित कार्यों को तय समय सीमा में पूरा किया जाए। चर्चा के अनुसार उन्होंने यह भी कहा कि पहले काम पूरा हो, उसके बाद आराम या अवकाश की बात की जाए। बैठक में मौजूद लोगों ने इस टिप्पणी को अलग-अलग नजरिए से देखा। कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह केवल कार्यों में तेजी लाने और जवाबदेही तय करने का संदेश था, जबकि कुछ इसे प्रशासनिक सख्ती के रूप में देख रहे हैं।

विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी की इस टिप्पणी के बाद नौकरशाही के भीतर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। एक वर्ग का मानना है कि यह संदेश उन अधिकारियों के लिए था जो महत्वपूर्ण परियोजनाओं में अपेक्षित गति नहीं ला पा रहे हैं। वहीं दूसरे वर्ग का कहना है कि इसे सामान्य प्रशासनिक निर्देश से अधिक महत्व नहीं दिया जाना चाहिए। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी भी पक्ष ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि समीक्षा बैठकों में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इस तरह की टिप्पणियां अक्सर कार्य संस्कृति को बेहतर बनाने और परिणामों पर फोकस बढ़ाने के उद्देश्य से की जाती हैं। बावजूद इसके, जब कोई टिप्पणी चर्चा का विषय बन जाती है तो उसके कई अर्थ और संकेत तलाशे जाने लगते हैं। फिलहाल यह कथित बयान प्रशासनिक हलकों में बहस और चर्चा का प्रमुख मुद्दा बना हुआ है तथा लोग इसके वास्तविक संदर्भ और मंशा को लेकर अपने-अपने अनुमान लगा रहे हैं।

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gaurav singh rajput

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