विभागीय बैठक में ‘ज्ञान की गंगा’ बहाते रहे साहब, अधिकारी देखते रह गए माहौल

प्रदेश के एक संवेदनशील विभाग में इन दिनों वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के बीच चल रही बैठकों की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में पुलिस अधिकारियों को दिए जाने वाले मेडल्स की सूची को लेकर आयोजित एक अहम बैठक प्रशासनिक गलियारों में खासा चर्चा का विषय बन गई। बताया जा रहा है कि बैठक में विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे और पूरी तैयारी के साथ पहुंचे अधिकारियों को उम्मीद थी कि विषय पर गंभीर और तेज़ी से निर्णय लिया जाएगा। लेकिन बैठक का माहौल उस समय अलग दिशा में चला गया, जब एक सीनियर आईपीएस अधिकारी लगातार अपनी बातों और अनुभवों के जरिए चर्चा पर पूरी तरह हावी होते नजर आए।

सूत्रों के अनुसार बैठक शुरू होते ही संबंधित मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय वरिष्ठ अधिकारी ने अलग-अलग विषयों पर लंबा वक्तव्य देना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है कि उन्होंने लगभग हर मुद्दे पर अपनी जानकारी और अनुभव साझा किए, जिससे बैठक का मूल एजेंडा पीछे छूटता दिखाई दिया। कई अधिकारियों के चेहरे पर असहजता भी देखी गई, क्योंकि चर्चा जिस विषय के लिए बुलाई गई थी, वह बार-बार दूसरी दिशा में जाती रही। विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी बीच में अपनी बात रखना चाहते थे, लेकिन माहौल ऐसा बन गया कि कोई खुलकर हस्तक्षेप नहीं कर सका।

मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ गई क्योंकि यह बैठक पुलिस अधिकारियों को सम्मानित करने वाली सूची से जुड़ी थी। सूत्रों का दावा है कि सूची में शामिल कुछ नामों को लेकर पहले से ही असहमति और चर्चाएं चल रही थीं। ऐसे में अधिकारियों को उम्मीद थी कि बैठक में पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ निर्णय होगा। हालांकि बैठक के दौरान मुख्य मुद्दों से ज्यादा व्यक्तिगत अनुभवों और ज्ञानपूर्ण टिप्पणियों पर जोर दिए जाने से कई अधिकारी अंदरखाने नाराज बताए जा रहे हैं।

प्रशासनिक हलकों में अब इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे वरिष्ठता के प्रभाव का उदाहरण मान रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि महत्वपूर्ण बैठकों में विषय केंद्रित चर्चा होना जरूरी है। फिलहाल विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह बैठक अब पुलिस और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन चुकी है।

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gaurav singh rajput

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