ईमानदार IPS की पोस्टिंग पर राजनीति! मलाईदार पदों से दूर रखने के आरोप

ध्य प्रदेश की नौकरशाही में एक बार फिर पोस्टिंग और पदस्थापना को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सूत्रों के अनुसार, एक सीनियर आईपीएस अधिकारी लंबे समय से सरकारी संस्थान में सीमित जिम्मेदारियों वाले पद पर कार्यरत हैं, जबकि उन्हें मुख्यधारा की प्रशासनिक जिम्मेदारियों से दूर रखा गया है। बताया जा रहा है कि अधिकारी को संस्थान में एक छोटे कमरे तक सीमित कर दिया गया, जिससे उनके अनुभव और क्षमता के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

चर्चा यह भी है कि संबंधित अधिकारी को प्रदेश के महत्वपूर्ण विभागों या प्रभावशाली पदों से लगातार दूर रखा गया। नौकरशाही के गलियारों में यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अधिकारी को ईमानदार और स्पष्ट छवि वाला माना जाता रहा है। कई लोग इसे प्रशासनिक प्राथमिकताओं का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे सिस्टम के भीतर चल रही खींचतान और शक्ति संतुलन से जोड़कर देख रहे हैं।

वहीं राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि हाल के वर्षों में कई अधिकारियों को उनकी कार्यशैली और सत्ता से समीकरणों के आधार पर जिम्मेदारियां दी गईं। ऐसे में इस सीनियर आईपीएस अधिकारी की स्थिति को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या अनुभव और सेवा रिकॉर्ड से ज्यादा महत्व अब ‘सिस्टम में फिट बैठने’ को दिया जा रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, अधिकारी को हाल ही में एक नई जिम्मेदारी जरूर सौंपी गई है, लेकिन इसे भी अपेक्षित महत्व वाला पद नहीं माना जा रहा। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रदेश में अधिकारियों की पोस्टिंग प्रक्रिया, पारदर्शिता और प्रशासनिक संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। हालांकि सरकार या संबंधित विभाग की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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