
कृष्णपाल पाल|शिवपुरी, 6 अक्टूबर 2026। मध्य प्रदेश में एक ओर नशामुक्ति को लेकर अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं शिवपुरी जिले के अमोला थाना क्षेत्र के ग्राम नारही से बच्चों को कथित तौर पर अवैध शराब की बिक्री में इस्तेमाल किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि पढ़ने-लिखने की उम्र के बच्चों से शराब की बिक्री कराई जा रही है। मामले को लेकर ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
बच्चों से शराब बिकवाने के आरोप से गांव में चिंता
ग्रामीणों के मुताबिक नारही गांव में कथित रूप से लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार चल रहा है। अब आरोप है कि इस गतिविधि में नाबालिग बच्चों को भी शामिल किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिन बच्चों के हाथों में किताब और कलम होनी चाहिए, उनसे शराब की थैलियां पहुंचाने या बेचने का काम कराया जा रहा है।
यदि जांच में बच्चों को अवैध शराब के कारोबार में इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि होती है, तो मामला केवल आबकारी कानून तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें बच्चों के संरक्षण और बाल श्रम से जुड़े कानूनी प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच के बाद ही हो सकेगी।
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प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
मामले को लेकर ग्रामीणों ने मध्य प्रदेश शासन, शिवपुरी कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला आबकारी विभाग से शिकायत की जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई के साथ यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि बच्चों को इस गतिविधि में कौन और किस तरह शामिल कर रहा है।
शिवपुरी जिले में अवैध शराब के खिलाफ प्रशासन पहले भी विशेष अभियान के निर्देश जारी कर चुका है। सितंबर में कलेक्टर (आबकारी) कार्यालय की ओर से अवैध शराब के निर्माण, संग्रहण, बिक्री और परिवहन पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए थे। ग्राम स्तर पर भी संबंधित कर्मचारियों को ऐसी गतिविधियों की सूचना प्रशासन तक पहुंचाने को कहा गया था।
अमोला थाना क्षेत्र में हाल के महीनों में शराब से जुड़े कई मामले सामने आए हैं। सितंबर में अमोलपठा में शराब दुकान को लेकर विवाद और कार्रवाई हुई थी।
बच्चों को नशे के कारोबार से दूर रखने की मांग
ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन नारही गांव में अवैध शराब की बिक्री की जांच करे और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही जिन बच्चों को कथित तौर पर इस काम में लगाया जा रहा है, उनकी स्थिति की भी जांच कर उन्हें शिक्षा और सुरक्षित वातावरण से जोड़ा जाए।
फिलहाल नारही गांव के इन आरोपों पर पुलिस, आबकारी विभाग या जिला प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में मामले में लगाए गए आरोपों को जांच के बाद ही तथ्य के रूप में स्थापित किया जा सकेगा।
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