सुप्रीम कोर्ट में हेट स्पीच याचिकाएं खारिज, संसद की भूमिका पर साफ संदेश

नई दिल्ली| सुप्रीम कोर्ट ने हेट स्पीच से जुड़ी याचिकाओं पर अहम फैसला सुनाया। हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट फैसला के तहत अदालत ने स्पष्ट किया कि वह संसद को नया कानून बनाने के लिए बाध्य नहीं कर सकती। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि कानून बनाना विधायिका का काम है और न्यायपालिका इस क्षेत्र में सीमित भूमिका निभाती है।

अदालत का स्पष्ट रुख

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी नए कानून की जरूरत तय करना संसद का अधिकार है। अदालत केवल सुझाव दे सकती है, लेकिन वह सरकार या संसद को कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि मौजूदा कानूनी ढांचा हेट स्पीच से निपटने के लिए पर्याप्त है। समस्या कानून की कमी नहीं, बल्कि उसके सही और समय पर लागू न होने की है। कई मामलों में कार्रवाई में देरी या असमानता देखने को मिलती है, जिससे विवाद बढ़ता है।
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि न्यायपालिका का काम नए अपराध तय करना नहीं है। अगर हर मामले में अदालत हस्तक्षेप करेगी, तो शक्तियों के संतुलन का सिद्धांत प्रभावित होगा। इसलिए जहां कानून मौजूद है, वहां अदालत को संयम रखना चाहिए।

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सीमाएं

फैसले में अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लोकतंत्र का आधार बताया। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि यह अधिकार पूर्ण नहीं है और सार्वजनिक व्यवस्था, गरिमा और सामाजिक सौहार्द के लिए इस पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। कोर्ट के अनुसार, ऐसा भाषण जो समाज में नफरत फैलाता है या समुदायों के बीच तनाव बढ़ाता है, वह लोकतंत्र को कमजोर करता है। इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग माना जा सकता है।
अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को यह स्वतंत्रता दी है कि वे समय और परिस्थितियों के अनुसार कानून में बदलाव या नया कानून लाने का निर्णय लें। इसमें लॉ कमीशन की 2017 की रिपोर्ट के सुझावों पर भी विचार किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन को स्पष्ट करता है। इससे यह संदेश गया है कि कानून बनाने की जिम्मेदारी संसद की है, जबकि अदालत का काम मौजूदा कानूनों का सही पालन सुनिश्चित करना है।

यह भी पढ़े: आधार कार्ड को लेकर नया अपडेट, अब जन्मतिथि का प्रमाण नहीं माना जाएगा

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Srota Swati Tripathy

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