
तमिलनाडू ।
तमिलनाडु में एक बार फिर हिंदी को लेकर विवाद तेज होता नजर आ रहा है। यहाँ राज्य के रेलवे स्टेशनों पर लिखे हिंदी नामों पर काली स्याही पोतने की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे भाषा को लेकर राजनीतिक और सामाजिक तनाव बढ़ गया है।
जानकारी के मुताबिक, कुछ प्रोटेस्ट करने वाले लोगों ने रेलवे स्टेशन के बोर्ड पर लिखे हिंदी शब्दों को काले रंग से ढक दिया। यह कदम कथित तौर पर “हिंदी थोपने” के विरोध में उठाया गया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है । प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों का कहना था कि “हिंदी हमारे लिए बोझ है, तमिल हमारी मां है” और अगर किसी भी तरह से हिंदी थोपी गई तो तमिलनाडु उसे स्वीकार नहीं करेगा। यह नारा वहां मौजूद लोगों के बीच तेजी से गूंजता रहा।
घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बोर्ड साफ करवाया और मामले की जांच शुरू कर दी। साथ ही रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने इसमें शामिल लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर किया है।
दरअसल, तमिलनाडु में लंबे समय से केंद्र सरकार की भाषा नीति और नई शिक्षा नीति (NEP) को लेकर विरोध चल रहा है। राज्य की सत्ताधारी पार्टी DMK और अन्य तमिल संगठनों का आरोप है कि इन नीतियों के जरिए हिंदी को बढ़ावा देकर उसे थोपने की कोशिश की जा रही है। हाल ही में ,कई जगहों पर भी इसी तरह के विरोध देखने को मिले हैं, जहां हिंदी साइनबोर्ड को नुकसान पहुंचाया गया या उसे काला किया गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में भाषा सिर्फ संचार का माध्यम नहीं, बल्कि पहचान और सम्मान का मुद्दा है। ऐसे में हिंदी बनाम तमिल विवाद समय-समय पर उभरता रहता है और इसका सीधा असर राज्य की राजनीति पर भी पड़ता है।
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