
उमरिया/राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट: जिले के आदिवासी बाहुल्य विकासखंड बिरसिंहपुर पाली के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या सड़क की है। खराब और कच्चे रास्तों के कारण लोगों को रोजमर्रा के कामों के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में गांवों तक पहुंचने वाले रास्तों की हालत और खराब हो जाती है। कीचड़ और पानी से भरे मार्गों पर चलना मुश्किल हो जाता है। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों और मरीजों पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को स्कूल पहुंचने में काफी दिक्कत होती है। कई बच्चे मजबूरी में कीचड़ भरे रास्तों से होकर स्कूल जाते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं, खराब मार्गों के चलते शिक्षकों को भी समय पर गांव पहुंचने में परेशानी होती है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि सड़क खराब होने के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती।
गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना मुश्किल हो जाता है। कई बार लोगों को मरीजों को खाट या निजी साधनों के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है। अब ग्रामीणों ने उमरिया कलेक्टर से गुहार लगाते हुए जल्द से जल्द पक्की सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जब तक सड़क का निर्माण नहीं होता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था कर लोगों को राहत दी जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल आवागमन का माध्यम नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जिला प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द कार्रवाई करेगा, जिससे क्षेत्र के लोगों को मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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