उमरिया/चंदवार में बड़ा खुलासा: खाली खेतों में भी कागजों पर दिखी चना-मसूर की फसल, पटवारी पर गंभीर आरोप

उमरिया/राकेश दर्दवंशी की रिपोर्ट: चंदवार हल्के में राजस्व रिकॉर्ड और कृषि उपज मंडी में फसल बिक्री को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि खेत पूरी तरह खाली होने के बावजूद कागजों में चना और मसूर की फसल दर्ज कर दी गई और उसी आधार पर मंडी में बड़ी मात्रा में दलहनी फसलों की बिक्री भी हो गई। इस पूरे मामले ने किसानों और ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है।

स्थानीय किसानों का कहना है कि मौके पर जिन खेतों में चना और मसूर दिखाया गया है, वहां न तो फसल के ठूंठ दिखाई देते हैं और न ही कटाई या खेती के कोई निशान। इसके बावजूद रिकॉर्ड में उन खेतों को दलहनी फसलों के रूप में दर्शाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि चंदवार हल्के के पटवारी द्वारा गिरदावरी में वास्तविक स्थिति के विपरीत प्रविष्टियां की गईं, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

मंडी में बिक्री के लिए पहुंची चना और मसूर की बड़ी खेप को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह फसल चंदवार निवासी रामानुज गुप्ता और ग्राम सिघंवाड़ निवासी रवि सिंह राठौर से जुड़ी है, जो खुद को किसान बताकर मंडी में फसल बेच रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ये लोग व्यापार से जुड़े हैं और छोटे किसानों से फसल खरीदकर सरकारी खरीद प्रक्रिया का लाभ उठा रहे हैं।

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ग्रामीणों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण में गिरदावरी प्रक्रिया की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है, क्योंकि बिना वास्तविक खेती के ही खेतों को उत्पादन योग्य दिखा दिया गया है। इससे न केवल राजस्व व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं, बल्कि वास्तविक किसानों के हित भी प्रभावित हो सकते हैं।

हालांकि खरीदी प्रभारी की किसी प्रकार की लापरवाही से इनकार किया जा रहा है। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह मांग उठ रही है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिकॉर्ड और वास्तविकता के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे आया। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिले में दलहन और तिलहन फसलों के वास्तविक रकबे और मंडी में हो रही आवक के बीच अंतर भी जांच का विषय है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है और क्या वास्तविक स्थिति सामने आ पाती है।

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    Rashel Kachwah Rajput

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