
लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में बढ़ती बिजली मांग और भीषण गर्मी के बीच आमजन को निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गांव हो या नगर, किसी भी क्षेत्र में बिजली संकट की स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए और सभी स्तरों पर सतत मॉनिटरिंग की जाए।
मुख्यमंत्री रविवार को ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की उपस्थिति में ऊर्जा विभाग, पावर कॉरपोरेशन तथा सभी डिस्कॉम के अधिकारियों के साथ विद्युत आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा कर रहे थे। बैठक में उन्होंने उत्पादन क्षमता बढ़ाने, सभी इकाइयों को पूरी दक्षता के साथ संचालित करने और ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत व भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया।
सीएम योगी ने कहा कि बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए उत्पादन इकाइयों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाए और तकनीकी दक्षता व रखरखाव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। बैठक में बताया गया कि राज्य की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता 13,388 मेगावाट तक पहुंच चुकी है, जबकि गैर पारंपरिक ऊर्जा से लगभग 10 हजार मेगावाट अतिरिक्त बिजली उत्पादन हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने ट्रांसमिशन व्यवस्था की मजबूती पर विशेष जोर देते हुए कहा कि किसी भी तकनीकी बाधा को न्यूनतम रखा जाए और सिस्टम की लगातार निगरानी हो। बैठक में बताया गया कि प्रदेश में ट्रांसमिशन नेटवर्क 60,858 सर्किट किलोमीटर लाइनों और 715 उपकेंद्रों के माध्यम से संचालित है तथा पारेषण हानियां घटकर 3.2 प्रतिशत रह गई हैं।
उन्होंने वितरण व्यवस्था को और जवाबदेह बनाने के निर्देश देते हुए फीडर वाइज मॉनिटरिंग और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि ट्रांसफॉर्मर खराब होने, फीडर बाधित होने या शिकायत निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने आंधी-तूफान जैसी परिस्थितियों में भी त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम सक्रिय रखने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि हालिया आंधी-तूफान के दौरान 38 सब-स्टेशन और 326 फीडर प्रभावित हुए थे, जिन्हें तेजी से बहाल किया गया। उन्होंने हेल्पलाइन 1912 कॉल सेंटर की समीक्षा के निर्देश देते हुए कहा कि ऊर्जा मंत्री और राज्य मंत्री स्वयं इसका भौतिक निरीक्षण करें। साथ ही उपभोक्ताओं को समय पर और सही जानकारी देने, समाधान की समयसीमा स्पष्ट करने और पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को समय पर सही बिल उपलब्ध कराने और बिलिंग-कलेक्शन एफिशिएंसी बढ़ाने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति केवल तकनीकी विषय नहीं बल्कि किसानों, उद्योगों और आमजन के जीवन से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अंत में मुख्यमंत्री ने दोहराया कि प्रदेशवासियों को बेहतर, भरोसेमंद और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध कराना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी डिस्कॉम मिलकर इस लक्ष्य को पूरा करें।
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