
वॉशिंगटन/ब्रसेल्स: अमेरिका ने जर्मनी से करीब 5,000 सैनिकों को वापस बुलाने का फैसला किया है, जिसके बाद नाटो देशों में हलचल बढ़ गई है। पेंटागन ने कहा कि यह वापसी अगले 6 से 12 महीनों में पूरी की जाएगी। इस फैसले को यूरोप और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है।
पेंटागन प्रवक्ता सीन पार्नेल ने बताया कि यूरोप में अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। फिलहाल जर्मनी में करीब 36 हजार से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात हैं, जो यूरोप में अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य मौजूदगी मानी जाती है।
नाटो ने कहा है कि वह अमेरिका के साथ इस फैसले के विवरण को समझने के लिए काम कर रहा है। नाटो प्रवक्ता ने कहा कि यह कदम यूरोपीय देशों के लिए संकेत है कि उन्हें अपनी रक्षा क्षमताओं में और निवेश करना होगा। यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के बीच तीखी बयानबाजी हुई है।
मर्ज ने ईरान मुद्दे पर कहा था कि तेहरान अमेरिका को बातचीत की मेज पर “अपमानित” कर रहा है। इसके जवाब में ट्रंप ने कहा कि मर्ज “जानते नहीं कि वे क्या कह रहे हैं।” इसके अलावा ट्रंप प्रशासन ने यूरोपीय संघ से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने की भी घोषणा की है।
इसका सबसे ज्यादा असर जर्मनी की ऑटो कंपनियों पर पड़ सकता है।जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि अमेरिका द्वारा यूरोप और जर्मनी से सैनिकों की वापसी की संभावना पहले से थी। वहीं जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने कहा कि जर्मनी इस मुद्दे पर नाटो के भीतर करीबी चर्चा कर रहा है। – afp news
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