
मध्य प्रदेश के नवनिर्मित वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से महत्वपूर्ण वन्यजीव अपडेट सामने आया है। रिजर्व के मोहली परिक्षेत्र में हाल के दिनों में हुई बाघों की गतिविधियों और हमलों के बाद वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस क्षेत्र में दो अलग-अलग बाघ सक्रिय हैं। विभाग के अनुसार, सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह भ्रम फैल रहा था कि दोनों घटनाओं में एक ही बाघ शामिल है, लेकिन वैज्ञानिक जांच में यह दावा गलत साबित हुआ है।
वनकर्मियों पर हमले के बाद शुरू हुई जांच
वन विभाग के अनुसार, 5 जुलाई 2026 को मोहली परिक्षेत्र में नियमित गश्त के दौरान एक बाघ ने दो वनकर्मियों के बेहद करीब पहुंचकर हमला कर दिया। इस घटना में गश्ती दल के श्रमिक बाबूलाल रैकवार के पैर में गंभीर चोट आई। घटना के बाद घायल कर्मचारी को उपचार के लिए भेजा गया और हमलावर बाघ की पहचान के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया।
हाथियों और कैमरा ट्रैप की मदद से हुई पहचान
वन विभाग ने घटनास्थल के आसपास हाथियों की मदद से सर्च ऑपरेशन चलाया। 7 जुलाई को गश्त के दौरान महावत को घटनास्थल के पास एक बाघ शावक दिखाई दिया। विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, नवंबर 2025 में कैमरा ट्रैप में भी इस शावक की तस्वीरें कैद हुई थीं। उस समय इसकी उम्र 9 से 12 महीने आंकी गई थी, जो अब करीब 15 से 18 महीने हो चुकी है। पगमार्क और वनकर्मियों के बयानों के आधार पर अधिकारियों ने निष्कर्ष निकाला कि वनकर्मियों पर हमला इसी शावक ने किया था।
बाघ गणना 2025 के आंकड़ों से दूर हुआ भ्रम
कुछ दिन पहले पटना मोहली गांव के पास भी एक ग्रामीण पर बाघ के हमले की घटना सामने आई थी। दोनों घटनाओं को एक ही बाघ से जोड़कर देखा जा रहा था। हालांकि, वन विभाग की तकनीकी टीम ने अखिल भारतीय बाघ गणना 2025 के दौरान एकत्र किए गए फोटो और बाघों की धारियों (स्ट्राइप पैटर्न) का विश्लेषण किया। जांच में पुष्टि हुई कि ग्रामीण पर हमला करने वाला बाघ और वनकर्मियों पर हमला करने वाला बाघ शावक दो अलग-अलग बाघ हैं।
ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
वन विभाग ने स्थानीय लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। विभाग का कहना है कि दोनों बाघों की पहचान हो चुकी है और उनकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। साथ ही ग्रामीणों और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए गश्त बढ़ा दी गई है तथा संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
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