
जिन हाथों ने कभी अपराधियों में खौफ पैदा किया और जो अफसर अपनी ‘आयरन बॉडी’ और सख्त अनुशासन के लिए महकमे में मिसाल माने जाते थे, आज वही शख्सियत अपनी आवाज़ के जादू से लाखों दिलों को सुकून दे रही है। बात हो रही है एक ऐसे रिटायर्ड सीनियर IPS साहब की, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद वर्दी तो उतार दी, लेकिन अपना जुनून नहीं बदला—बस अब उनका मैदान बदल गया है।
जिम की फिटनेस से कविताओं के मंच तक
कल तक जिनकी पहचान सुबह की मीलों लंबी दौड़, जिम में पसीना बहाना और युवाओं को फिटनेस टिप्स देना थी, आज उनकी बुलंद आवाज़ सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर गूंज रही है। रिटायरमेंट के बाद साहब ने एक ऐसा ‘अवतार’ लिया है जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी। वे अब न केवल प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं को अपनी दमदार आवाज़ में पेश कर रहे हैं, बल्कि खुद की लिखी मर्मस्पर्शी कविताएं भी साझा कर रहे हैं।
देशभक्ति और जीवन दर्शन का अनूठा संगम
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उनके वीडियोज़ में कभी देशभक्ति का जोश उबाल मारता है, तो कभी जीवन दर्शन की ऐसी गहराई दिखती है जो सुनने वालों को सोचने पर मजबूर कर देती है। उनके फॉलोअर्स की संख्या रातों-रात बढ़ रही है। प्रशंसक कह रहे हैं, “साहब की आवाज़ में वही अनुशासन है, जो कभी उनकी ड्यूटी में दिखता था।
“वर्दी की सख्ती के पीछे छिपा था एक कोमल हृदय। कानून की बारीकियों के बीच कविता की डायरी ने अपनी जगह बना ही ली।”
सस्पेंस बरकरार: वकील की दलील या कवि का मंच?
दिलचस्प बात यह है कि रिटायरमेंट से पहले साहब ने ऐलान किया था कि वे पूर्णकालिक तौर पर वकालत करेंगे और अदालत में अपनी ‘दूसरी पारी’ खेलेंगे। लेकिन फिलहाल जो हालात हैं, उन्हें देखकर महकमे और आम जनता के बीच चर्चा तेज है: साहब का अगला कदम क्या होगा? क्या वे कोर्टरूम में कानून की पेचीदगियों पर बहस करेंगे?
या फिर बड़े कवि सम्मेलनों के मंच पर अपनी कविताओं से समां बांधेंगे?
फिलहाल तो यह ‘फिटनेस फ्रीक’ IPS अफसर अपने “कवि हृदय” अवतार के कारण पूरी तरह लाइमलाइट में हैं। कानून की किताबों और कविता की डायरी के बीच छिड़ी इस जंग में जीत चाहे जिसकी हो, लेकिन फायदा सुनने और चाहने वालों का ही हो रहा है।







