
सागर/मनीष चौबे: मध्य प्रदेश के सागर जिले में किन्नर समाज के भीतर चल रहा आंतरिक मनमुटाव अब हिंसक मोड़ ले चुका है। शहर का किन्नर समुदाय स्पष्ट रूप से दो गुटों में विभाजित हो गया है, जिसके चलते सार्वजनिक रूप से विवाद और हंगामे की स्थिति निर्मित हो रही है। ताजा घटनाक्रम में, बड़ी संख्या में किन्नरों ने मोतीनगर थाने का घेराव किया और दूसरे पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस को ज्ञापन सौंपा।
विवाद की मुख्य जड़: ‘नायक’ पद का चुनाव
प्राप्त जानकारी अनुसार इस पूरे विवाद की शुरुआत हाल ही में आयोजित हुई ‘किन्नर पंचायत’ के बाद हुई। बताया जा रहा है कि इस पंचायत में गोलू मांझी को सागर का नया ‘नायक’ घोषित किया गया था। इस निर्णय ने समाज को दो धड़ों में बाँट दिया। पहला गुट किरण नायक का है जो पुरानी व्यवस्था और किरण नायक के नेतृत्व का समर्थन कर रहा हैजबकि दूर गुट गोलू मांझी गुका है, जो पंचायत के फैसले के बाद गोलू मांझी को अपना नया मुखिया मान रहा है।
मारपीट और तोड़फोड़ के गंभीर आरोप
मोतीनगर थाने पहुँचे किन्नरों के समूह ने रानी ठाकुर और उनके समर्थकों पर मारपीट करने, अभद्रता करने और संपत्तियों में तोड़फोड़ करने के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नए नायक के चयन के बाद से ही विरोधी गुट उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है।
“समाज के नियमों के अनुसार पंचायत ने फैसला लिया है, लेकिन कुछ लोग सत्ता के लालच में हिंसा पर उतारू हैं। हम न्याय की माँग करने थाने आए हैं।” — पीड़ित पक्ष का बयान
धर्मांतरण के आरोपों से शुरू हुई थी कलह
गौरतलब है कि इस विवाद की पृष्ठभूमि कुछ समय पहले ही तैयार हो गई थी। निवर्तमान नायक किरण नायक पर धर्मांतरण से जुड़े कुछ गंभीर आरोप लगे थे, जिसके बाद वे विवादों के घेरे में आ गई थीं। इस घटनाक्रम ने समाज के भीतर असंतोष पैदा किया, जिसके परिणामस्वरूप गोलू मांझी को नया नायक घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई।
पुलिस की कार्रवाई और वर्तमान स्थिति
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मोतीनगर थाना पुलिस सक्रिय हो गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों की बातें सुनी जा रही हैं। ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की जाँच के लिए सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयान लिए जा रहे हैं। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इलाके में सतर्कता बरती जा रही है।
सागर में किन्नर समाज का यह विवाद केवल दो व्यक्तियों की लड़ाई नहीं, बल्कि परंपरा और नए नेतृत्व के बीच के संघर्ष का प्रतीक बन गया है। अब देखना यह होगा कि पुलिस की जाँच और समाज के बुजुर्गों का हस्तक्षेप इस विवाद को शांत कर पाता है या वर्चस्व की यह जंग और तेज होती है।
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