डॉ. यादव का ‘सुशासन’ या भ्रष्ट अफसरों का ‘मधुशाला’? करोड़ों की लूट पर क्यों मौन हैं मुख्य सचिव अनुराग जैन?

ब्रांडवाणी का बड़ा खुलासा: जनसंपर्क और “माध्यम” में भ्रष्टाचार का निर्दोष प्रदर्शन

भोपाल। मध्य प्रदेश का जनसंपर्क विभाग और ‘माध्यम’ इन दिनों लोक-कल्याण की योजनाओं का नहीं, बल्कि ‘लूट और कमीशन’ के विज्ञापनों का केंद्र बन चुका है। प्रदेश के मुखिया डॉ. मोहन यादव जहाँ मंचों से भ्रष्टाचार पर ‘बुलडोजर’ चलाने की कसमें खाते हैं, वहीं उनकी नाक के नीचे ‘माध्यम’ के सफेदपोश सिंडिकेट ने सरकारी खजाने को निजी जागीर बना लिया है। सवाल यह है कि प्रशासनिक सर्जरी के माहिर माने जाने वाले मुख्य सचिव अनुराग जैन की पैनी नजर इन ‘मलाईदार’ फाइलों तक क्यों नहीं पहुँच पा रही?

‘ब्रांडवाणी समाचार’ के पास उपलब्ध पुख्ता जानकारी के अनुसार, विभाग में 25% से 35% तक के ‘कट’ का ऐसा खेल चल रहा है जिसने पिछली सरकारों के रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिए हैं। यहाँ नियम कायदे नहीं, बल्कि ‘अफसरों की रजामंदी’ तय करती है।

  • टेंट के नाम पर टैक्स चोरी‘: ₹10 की कुर्सी का किराया फाइलों में ₹1000 दर्ज हो रहा है। टेंट और डेकोरेशन के नाम पर करोड़ों के बिल ऐसे पास हो रहे हैं जैसे प्रदेश में कोई आयोजन नहीं, बल्कि ‘शाही शादी’ हो रही हो।
  • अनुराग जैन के ‘मैनेजमेंट गुरु’: मुख्य सचिव अनुराग जैन से जनता को उम्मीद थी कि वे व्यवस्था सुधारेंगे, लेकिन विभाग में जमे ‘दागी और जुगाड़ू’ अफसरों की फौज ने उनके सुरक्षा कवच को भी भेद दिया है। क्या मुख्य सचिव को इन बिलों की गंध नहीं आ रही?
घोटाले का केंद्रभ्रष्टाचार की विधिवर्तमान स्थिति
माध्यमचुनिंदा वेंडर्स का एकाधिकार।‘सिंडिकेट’ के बाहर किसी को एंट्री नहीं।
इवेंट मैनेजमेंटधरातल पर सादगी, कागजों पर विलासिता।करोड़ों का भुगतान बिना सत्यापन के।
विज्ञापनों की रेवड़ीडमी पोर्टल और कागजी अखबारों को रेवड़ी।असली प्रचार गायब, ‘जी-हुजूरी’ को ईनाम।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यह समझना होगा कि जनसंपर्क विभाग सरकार का चेहरा होता है। यदि चेहरे पर ही ‘भ्रष्टाचार की कालिख’ पुती हो, तो सुशासन का ढोल पीटना व्यर्थ है। ‘ब्रांडवाणी समाचार’ सीधा प्रश्न करता है:

  1. क्या मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इन फाइलों के ऑडिट की हिम्मत दिखाई?
  2. क्या ‘माध्यम’ के उन अफसरों की संपत्ति की जांच होगी जो रातों-रात करोड़पति बन गए?
  3. क्या मुख्यमंत्री जी का ‘बुलडोजर’ इन भ्रष्ट अधिकारियों के केबिन तक पहुँचेगा?

जनसंपर्क विभाग और माध्यम में बैठा यह ‘सिंडिकेट’ सरकार की साख को दीमक की तरह चाट रहा है। यदि तत्काल प्रभाव से इन ‘लुटेरों’ पर नकेल नहीं कसी गई, तो ‘ब्रांडवाणी समाचार’ सबूतों के साथ उन नामों का खुलासा करेगा जिन्होंने भोपाल से लेकर दिल्ली तक इस भ्रष्टाचार की सीढ़ी बनाई है।

जनता देख रही है, साहब! जवाब तो देना होगा।

विशेष डेस्क, ब्रांडवाणी समाचार ब्यूरो, मध्य प्रदेश

  • Shruti Soni

    ब्रांडवाणी समाचार

    अनुभवी पत्रकार। हर दिन ताज़ा और सटीक खबरों के साथ आपकी सेवा में। निष्पक्ष रिपोर्टिंग और गहराई से तथ्य प्रस्तुत करना मेरी पहचान है।

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