
“नियमों पर भारी पड़ी राजनैतिक रसूख; अफसर को मिला ऑफिसर्स मेस का आसरा“
राजनीति में कहते हैं कि पद चला जाता है, लेकिन ‘पावर’ का नशा उतारने में वक्त लगता है। आज हम आपको एक ऐसी ही दिलचस्प कहानी बताने जा रहे हैं, जहाँ लोकतंत्र के चुनाव में हारने के बाद भी एक पूर्व मंत्री का दबदबा बरकरार है। आलम यह है कि एक वरिष्ठ IPS अधिकारी को आवंटित सरकारी बंगले पर पूर्व मंत्री जी कुंडली मार कर बैठे हैं।
मामला शहर के एक आलीशान सरकारी बंगले का है। विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बावजूद, पूर्व मंत्री जी का रूतबा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सरकारी नियमों के मुताबिक, यह बंगला हाल ही में एक सीनियर IPS अफसर को आवंटित किया गया था। लेकिन ‘पुराने खिलाड़ी’ कहे जाने वाले नेता जी ने अपनी पहुंच का ऐसा इस्तेमाल किया कि प्रशासन भी नतमस्तक हो गया।
सूत्रों के अनुसार, नेता जी ने सीधे ‘ऊपरी स्तर’ पर अपनी गोटियाँ सेट कीं और बंगला खाली न करने का आग्रह (या कहें दबाव) बना दिया। नतीजा यह हुआ कि मामला ठंडे बस्ते में चला गया। आज स्थिति यह है कि जिस बंगले में IPS अफसर को शिफ्ट होना था, वहां पूर्व मंत्री जी का कब्जा कायम है और रक्षक कहे जाने वाले अफसर साहब खुद ‘ऑफिसर्स मेस’ में दिन गुजारने को मजबूर हैं।
हालांकि, इस पूरी घटना में IPS अफसर की सादगी की भी चर्चा हो रही है। अपनी सीधी छवि के लिए जाने जाने वाले इस अधिकारी ने किसी भी तरह के विवाद या ‘जोड़-तोड़’ में पड़ने के बजाय, शालीनता से सरकार को दूसरा बंगला आवंटित करने का अनुरोध किया है। यह घटना दर्शाती है कि कभी-कभी नियम-कायदों से ऊपर राजनैतिक रसूख की दीवार खड़ी हो जाती है।
- रसूख की जंग: चुनाव हारने के बाद भी सरकारी बंगले पर डटे रहे पूर्व मंत्री।
- प्रशासनिक लाचारी: सीनियर IPS को आवंटित बंगला खाली कराने में विभाग नाकाम।
- अफसर का संयम: विवाद के बजाय IPS अधिकारी ने दूसरे बंगले की मांग कर पेश की मिसाल।







