
ग्वालियर: नगर निगम में भ्रष्टाचार की गंगोत्री का प्रवाह शीर्ष स्तर से होता है। जनप्रतिनिधियों और नेताओं, जिन्हें आपने अपने शहर को सुंदर, स्वच्छ और सुविधायुक्त बनाने के लिए चुना है, पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम के अधिकांश पार्षद और जनप्रतिनिधि अपने रिश्तेदारों और चहेतों के नाम पर विकास कार्यों का ठेका लेकर मलाई खाने में जुटे हैं।
भ्रष्टाचार की हकीकत: समय-समय पर इन भ्रष्टाचार मामलों का खुलासा होता रहा है। निगम के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल तब खड़े होते हैं जब विकास कार्यों के टेंडर जारी होने के बाद निगम के उपनेता ठेकेदार को काम नहीं करने देते, क्योंकि ठेकेदार ने उनकी सेवा या भूमिपूजन का खर्च नहीं उठाया।
मामला: ग्वालियर के सैफ अली, जो कि पेशे से सिविल कॉन्ट्रैक्टर हैं, ने वार्ड नंबर 53 में नाले के निर्माण का टेंडर लिया है। उनका आरोप है कि स्थानीय पार्षद और निगम के उपनेता मंगल यादव ने उन्हें कार्य करने से रोका।
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