
भोपाल: मध्य प्रदेश कैडर के एक वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से घर वापसी ने राज्य के प्रशासनिक और पुलिस महकमे में हलचल तेज कर दी है। दिल्ली के ‘पावर कॉरिडोर्स’ का लंबा अनुभव लेकर लौटे इन साहब ने PHQ (पुलिस मुख्यालय) में अपनी उपस्थिति तो दर्ज करा दी है, लेकिन चर्चाओं का बाजार वल्लभ भवन (मंत्रालय) की पांचवीं मंजिल तक गर्म है।
‘वेटिंग फॉर पोस्टिंग’ और रसूख की जंग
ब्रांडवाणी न्यूज को मिली जानकारी के अनुसार एक नियमित वापसी के बाद अधिकारी ‘आमद’ दर्ज कराते हैं, लेकिन यहाँ मामला केवल जॉइनिंग का नहीं, बल्कि ‘मलाईदार’ और ‘वजनदार’ पदस्थापना का है। सूत्रों के मुताबिक, साहब की नजर विभाग के उन चुनिंदा ‘पावर सेंटर्स’ पर है, जहाँ नीतिगत निर्णयों और जिले की कमान पर नियंत्रण रहता है।
‘एडीजी’ से ‘डीजी’ स्तर के समीकरणों में बदलाव
दिल्ली से लौटे इन अधिकारी के रसूख ने पहले से कतार में लगे कद्दावर दावेदारों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। प्रशासनिक गलियारों में इसे ‘इम्पोर्टेड वर्सेस लोकल’ की जंग के रूप में भी देखा जा रहा है। साहब की सक्रियता और मंत्रालय के गलियारों में उनकी ‘सॉफ्ट लॉबिंग’ यह संकेत दे रही है कि वे किसी साधारण लूप-लाइन पद पर संतुष्ट होने वाले नहीं हैं।
‘चाय पर चर्चा’ और पुराने नेटवर्क का एक्टिवेशन
PHQ में पदभार की औपचारिक प्रतीक्षा के बीच, साहब ने अपने पुराने संपर्कों को ‘री-एक्टिवेट’ करना शुरू कर दिया है, नौकरशाही में इसे “नेटवर्किंग एंड अलाइनमेंट” कहा जा रहा है। वरिष्ठ अधिकारियों से शिष्टाचार भेंट के बहाने अपनी उपयोगिता और दिल्ली के ‘एक्सपोजर’ का हवाला दिया जा रहा है।
मंत्रालय का रुख और आगामी आदेश का इंतजार
असली पटकथा अब गृह विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय के बीच लिखी जानी है। क्या ‘साहब’ का दिल्ली वाला अनुभव उन्हें ADG/DG स्तर के किसी महत्वपूर्ण विंग (जैसे इंटेलिजेंस या कानून-व्यवस्था) की कमान दिला पाएगा? या फिर पहले से जमे हुए ‘सिपहसालार’ अपनी स्थिति बरकरार रखने में कामयाब होंगे?
प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि तेज हे की “साहब दिल्ली से सूटकेस कम, और संपर्कों की लिस्ट ज्यादा लेकर आए हैं। अब देखना है कि मंत्रालय की मुहर किस नाम पर लगती है”
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