
सिडनी/ऑस्ट्रेलिया: विश्वप्रसिद्ध ऑस्ट्रेलिया की पहचान माने जाने वाले सिडनी ओपेरा हाउस में आज सांस्कृतिक दृष्टिकोण से एक ऐतिहासिक क्षण दर्ज हुआ, जब बागेश्वर सरकार के संबोधन से पूरा सभागार ‘सनातन’ के उद्घोष से गूंज उठा। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ भारत और ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रगान के साथ हुआ, जहाँ हजारों लोगों ने एक साथ खड़े होकर वैश्विक एकता और राष्ट्र सम्मान का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर भारतीय मूल के श्रद्धालुओं के साथ-साथ ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की भी बड़ी संख्या मौजूद रही, जो सनातन संस्कृति को समझने और आत्मसात करने के लिए उत्साहित नजर आए। कार्यक्रम के प्रारंभ में सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। ‘बागेश्वर बालाजी’ के जयघोष से ओपेरा हाउस का सभागार गूंज उठा। मंच पर आगमन के साथ ही बागेश्वर सरकार का हजारों श्रद्धालुओं ने तालियां बजाकर स्वागत किया।
वैश्विक मंच पर सनातन संस्कृति का उदय
अपने संबोधन में बागेश्वर सरकार ने सनातन संस्कृति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना के वैश्विक विस्तार का संदेश दिया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक प्रवचन नहीं, बल्कि विदेशों में रह रहे भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़ने वाला एक सशक्त ‘सांस्कृतिक सेतु’ बनकर उभरा। ओपेरा हाउस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर उमड़ी श्रद्धा की यह विशाल भीड़ इस बात का प्रमाण है कि सनातन अब वैश्विक चेतना का रूप ले चुका है।
अंतरराष्ट्रीय सम्मान और गौरव
इस अवसर पर बागेश्वर धाम सरकार को ऑस्ट्रेलिया में एक भव्य एवं सम्मानजनक समारोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इसके पहले 14 अप्रैल 2026 को पार्लियामेंट ऑफ न्यू साउथ वेल्स में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान उन्हें उनके आध्यात्मिक योगदान और समाज में सकारात्मक प्रभाव के लिए औपचारिक सम्मान प्रदान किया गया था।
संसद की ओर से जारी सम्मान-पत्र में उनके कार्यों की सराहना करते हुए कहा गया कि उनकी उपस्थिति ने सांस्कृतिक संवाद, पारस्परिक समझ और वैश्विक मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मान-पत्र में यह भी उल्लेख किया गया कि शास्त्री जी का यह विदेश दौरा न केवल भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित कर रहा है, बल्कि विभिन्न समुदायों के बीच एकता, सहयोग और सद्भाव को भी सुदृढ़ कर रहा है।
समारोह का समापन और भारत के लिए गर्व का क्षण
इस अवसर ने ऑस्ट्रेलिया में भारतीय संस्कृति के प्रति बढ़ती आस्था और सम्मान को भी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को मिले इस अंतरराष्ट्रीय सम्मान से देशभर में उनके अनुयायियों और बागेश्वर धाम से जुड़े श्रद्धालुओं में हर्ष की लहर है। इसे भारत की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा के लिए एक गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण माना जा रहा है।
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